आंध्र प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन; CM नायडू ने नियम लागू करने का दिया अल्टीमेटम

After Karnataka, Andhra Pradesh now bans social media for children

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत के दक्षिण राज्यों में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक बड़ी डिजिटल क्रांति की शुरुआत हो गई है। कर्नाटक के बाद अब आंध्र प्रदेश सरकार ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर कड़ा प्रतिबंध लगाने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार, 6 मार्च को स्पष्ट किया कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य हो गया है।

13 साल तक के बच्चों पर पाबंदी

कर्नाटक के बाद आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की महत्वपूर्ण घोषणा की है। सरकार ने इस कड़े फैसले को लागू करने के लिए 90 दिनों का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत अगले तीन महीनों के भीतर चरणबद्ध तरीके (Phase-wise) से इस पाबंदी को प्रभावी बनाया जाएगा।

हालांकि अभी शुरुआती सीमा 13 साल तय की गई है, लेकिन सरकार इस एज लिमिट में विस्तार करने पर भी गंभीरता से विचार कर रही है ताकि इसे बढ़ाकर 16 साल किया जा सके। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि उम्र सीमा बढ़ाने का अंतिम निर्णय विशेषज्ञों के साथ विस्तृत पॉलिसी रिव्यू और गहन परामर्श के बाद ही लिया जाएगा, जिससे बच्चों के डिजिटल भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

16 साल से कम उम्र वालों के लिए ‘नो एंट्री’

आंध्र प्रदेश से पहले कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट सत्र के दौरान राज्य में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने का ऐलान किया था। कर्नाटक सरकार ने हाल ही में उच्च शिक्षा परिषद के कुलपतियों के साथ इस विषय पर गहन चर्चा की थी। हालांकि, कर्नाटक में इसे लागू करने की तकनीकी प्रक्रिया पर अभी स्पष्ट रोडमैप आना बाकी है।

भारत के अन्य राज्यों में भी बढ़ रही है मांग

दक्षिण भारत के इन दो प्रमुख राज्यों, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के साहसिक फैसलों के बाद अब पूरे देश में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंध की मांग तेज हो गई है। गोवा, बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर सोशल मीडिया के पड़ने वाले मनोवैज्ञानिक और सामाजिक प्रभावों की गहराई से जांच करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स और समितियों का गठन कर दिया है।

ये सभी राज्य मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के मॉडल को अपना आधार बना रहे हैं, जिसने हाल ही में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा के लिए दुनिया का सबसे सख्त सोशल मीडिया कानून लागू किया है। इस वैश्विक लहर के बीच, केंद्र सरकार ने भी अपनी सक्रियता बढ़ा दी है और आईटी मंत्रालय के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के साथ ‘एज-बेस्ड’ (उम्र-आधारित) प्रतिबंधों और सख्त वेरिफिकेशन नियमों पर चर्चा शुरू कर दी है, ताकि बच्चों को ऑनलाइन शोषण, साइबर बुलिंग और डिजिटल लत जैसे खतरों से सुरक्षित रखा जा सके।

नोट: यूनिक समय को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।

यह भी पढ़े: UPSC CSE 2025 Final Result Out: अनुज अग्निहोत्री ने किया टॉप; राजेश्वरी सुवे एम को दूसरा स्थान, यहाँ देखें टॉप 20 की पूरी लिस्ट

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*