
यूनिक समय, नई दिल्ली। अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस ग्रुप की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और सेबी (SEBI) की मौजूदा जाँचों के बीच, अब कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने भी ग्रुप की कई कंपनियों में फंड्स की कथित हेराफेरी की नई जाँच शुरू कर दी है।
SFIO को सौंपा गया मामला:
सूत्रों के मुताबिक, MCA की प्रारंभिक जाँच में बड़े पैमाने पर पैसों की हेराफेरी और कंपनी अधिनियम के तहत बड़े उल्लंघनों के संकेत मिले हैं। इसके बाद, MCA ने यह मामला अब गंभीर धोखाधड़ी जाँच कार्यालय (SFIO) को सौंप दिया है।
SFIO द्वारा रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर, रिलायंस कम्युनिकेशंस, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस और सीएलई प्राइवेट लिमिटेड समेत ग्रुप की कई कंपनियों में फंड्स के प्रवाह की जाँच करने और सीनियर मैनेजमेंट लेवल पर जिम्मेदारी तय करने की उम्मीद है।
ED की कार्रवाई:
MCA का यह कदम ऐसे समय में आया है जब ED ने रिलायंस ग्रुप के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। इस हफ्ते की शुरुआत में, ED ने धन शोधन निरोधक अधिनियम (PMLA) के तहत ग्रुप की 42 संपत्तियों को कुर्क करने के चार अस्थायी आदेश जारी किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग ₹7,500 करोड़ है।
इसमें अनिल अंबानी का मुंबई के पाली हिल स्थित पारिवारिक घर और उनकी कंपनियों की अन्य आवासीय तथा वाणिज्यिक संपत्तियाँ शामिल हैं। यह कुर्की रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े मामलों से जुड़ी है, जिसमें येस बैंक से 2017 और 2019 के बीच लिए गए लोन का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया था।
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर ने शेयर बाजार को सूचित किया है कि इन कार्रवाइयों का उनके संचालन, प्रदर्शन या भविष्य की संभावनाओं पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ा है और दोनों कंपनियाँ सामान्य रूप से काम कर रही हैं।
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