
यूनिक समय, नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने के संकल्प को दोहराते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विज्ञापन संख्या-51 के तहत आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर (सहायक आचार्य) भर्ती परीक्षा को निरस्त करने का कड़ा आदेश दिया है।
अप्रैल 2025 में आयोजित हुई इस परीक्षा में धांधली, अनियमितता और अवैध वसूली की गंभीर शिकायतें मिलने के बाद सरकार ने यह साहसिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी तत्व को बख्शा नहीं जाएगा और भर्ती प्रक्रिया की शुचिता हर हाल में बहाल की जाएगी।
सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित इस परीक्षा को लेकर जब भ्रष्टाचार की गोपनीय सूचनाएं प्राप्त हुईं, तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूपी एसटीएफ (STF) ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। जांच के दौरान एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ जो फर्जी प्रश्नपत्र बनाकर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल रहा था। एसटीएफ ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सदस्यों महबूब अली, बैजनाथ पाल और विनय पाल को गिरफ्तार किया है, जिनके खिलाफ लखनऊ के विभूतिखंड थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मुख्य अभियुक्त महबूब अली ने प्रश्नपत्रों की ‘मॉडरेशन प्रक्रिया’ के दौरान ही गोपनीयता भंग कर पेपर बाहर निकाल लिए थे और कई अभ्यर्थियों को भारी धन लेकर उपलब्ध कराए थे।
एसटीएफ द्वारा की गई डेटा एनालिसिस और गहन विवेचना में कई संदिग्ध अभ्यर्थियों की भूमिका भी स्पष्ट रूप से उजागर हुई, जिससे यह प्रमाणित हो गया कि परीक्षा की पवित्रता पूरी तरह भंग हो चुकी है। इन पुख्ता सबूतों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 910 पदों के लिए हुई इस पूरी परीक्षा को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का निर्णय लिया।
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस भर्ती परीक्षा को जल्द से जल्द दोबारा आयोजित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि आगामी चयन प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी हो, ताकि योग्य अभ्यर्थियों को ही स्थान मिले।
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