
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज 25 जून को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरेंगे, जो एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। इस मिशन को Axiom-4 नाम दिया गया है, और यह नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च होगा।
शुभांशु शुक्ला इस मिशन के पायलट होंगे और उनका यह अंतरिक्ष यात्रा में पहला कदम होगा, जो भारतीय अंतरिक्ष इतिहास को नई दिशा देने वाला है। यह मिशन भारतीय अंतरिक्ष यात्रा के लिए बेहद अहम है, क्योंकि इसके माध्यम से भारत ने एक और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।
Axiom-4 मिशन की प्रमुख बातें
लॉन्च का समय: 25 जून को सुबह 2:31 बजे (भारतीय समयानुसार दोपहर 12:01 बजे) से नासा के केनेडी स्पेस सेंटर से होगा।
रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट: इस मिशन में स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट का इस्तेमाल होगा, जो नए ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक ले जाएगा।
मिशन की अवधि: यह मिशन 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4:30 बजे ISS से डॉक करेगा।
पायलट: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला मिशन के पायलट के रूप में शामिल हैं।
क्रू के अन्य सदस्य: इस मिशन में भारतीय के अलावा पूर्व नासा अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, पोलैंड के अंतरिक्ष यात्री स्लावोश उजनांस्की-विस्निएव्स्की, और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री टिबोर कपु शामिल होंगे। यह चार सदस्य मिलकर ISS पर विभिन्न वैज्ञानिक शोध करेंगे।
Axiom-4 मिशन में भारत, पोलैंड, और हंगरी की भागीदारी इन देशों की अंतरिक्ष यात्रा में एक ऐतिहासिक मोड़ है। इस मिशन के तहत इन देशों की सरकार द्वारा प्रायोजित 40 वर्षों बाद पहली अंतरिक्ष उड़ान होगी। यह मिशन इन देशों के लिए दूसरा मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, और पहली बार सभी देशों के अंतरिक्ष यात्री ISS पर एक साथ मिशन पूरा करेंगे।
इस मिशन का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर लगभग 60 वैज्ञानिक अध्ययन और गतिविधियाँ करना है। ये अध्ययन दुनिया के 31 देशों के सहयोग से किए जाएंगे, जिनमें भारत, अमेरिका, पोलैंड, हंगरी, सऊदी अरब, ब्राजील, नाइजीरिया, UAE और यूरोप के देश शामिल हैं।
इस मिशन के साथ भारत का नाम भी अंतरिक्ष यात्रा के महत्वपूर्ण देशों की सूची में दर्ज हो जाएगा। शुभांशु शुक्ला की इस ऐतिहासिक यात्रा से भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और भी मजबूत होगा और भविष्य में अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियाँ हासिल की जा सकेंगी।
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