
यूनिक समय, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने के ऐलान को लेकर मचे घमासान के बीच, सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सख्त कदम उठाते हुए अपने विधायक हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया है। टीएमसी ने हुमायूं कबीर पर भाजपा की मदद से इस मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।
टीएमसी ने दी थी तीन बार चेतावनी
सीनियर टीएमसी मंत्री फिरहाद हाकिम ने इस कार्रवाई पर बयान देते हुए कहा, “हमने उन्हें पहले तीन बार चेतावनी दी थी।” कबीर के इस ऐलान के बाद न सिर्फ पश्चिम बंगाल, बल्कि उत्तर प्रदेश तक राजनीति गरमा गई थी। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि वह “एक भी ईंट नहीं रखने देंगे।” हिंदू संगठनों ने भी सीएम योगी आदित्यनाथ को इस संबंध में चिट्ठी लिखी थी।
क्या था हुमायूं कबीर का ऐलान?
हुमायूं कबीर, जो मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं, उन्होंने घोषणा की थी कि वह 6 दिसंबर को मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद का शिलान्यास करेंगे और इसे तीन साल में बनाने की तैयारी है। यह तारीख (6 दिसंबर) अयोध्या में बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी होने के कारण विशेष रूप से संवेदनशील मानी जाती है।
कबीर उन टीएमसी विधायकों में शामिल थे जो पार्टी नेतृत्व से खफा चल रहे थे, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी की आलोचना करने से परहेज किया था। पश्चिम बंगाल भाजपा ने उनके इस ऐलान को तुष्टिकरण की राजनीति करार दिया था।
हुमायूं कबीर का राजनीतिक सफर
3 जनवरी 1963 को जन्मे हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लंबे समय से सदस्य रहे हैं। वह अभी मुर्शिदाबाद जिले की भरतपुर विधानसभा सीट से विधायक हैं। 2021 के चुनावों में, कबीर ने BJP उम्मीदवार इमान कल्याण बनर्जी को हराकर 43,000 से ज़्यादा वोटों से जीत हासिल की। कबीर ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल में मंत्री भी रहे। कबीर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से की थी।
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