Bangladesh: छात्र नेता उस्मान हादी के भाई की ‘यूनुस सरकार’ को सीधी चुनौती; ‘न्याय नहीं मिला तो हसीना जैसा होगा अंजाम’

उस्मान हादी के भाई की 'यूनुस सरकार' को सीधी चुनौती

यूनिक समय, नई दिल्ली। बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हिंसक अस्थिरता और आरोपों का दौर शुरू हो गया है। हाल ही में छात्र नेता और इंकिलाब मंचो के संयोजक शरीफ उस्मान हादी की हत्या के बाद पूरे देश में तनाव व्याप्त है। मृतक के भाई ओमर हादी ने मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर सीधा प्रहार करते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है। ढाका के शाहबाग में आयोजित ‘शहीदी शपथ’ कार्यक्रम के दौरान ओमर हादी ने बेहद तल्ख लहजे में कहा कि उनके भाई की हत्या सत्ता में बैठे एक खास गुट ने इसलिए करवाई ताकि आगामी 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों को पटरी से उतारा जा सके और राजनीतिक अस्थिरता का फायदा उठाया जा सके।

उस्मान हादी के भाई ओमर हादी का आरोप है कि शरीफ उस्मान हादी को इसलिए रास्ते से हटाया गया क्योंकि उन्होंने किसी भी खुफिया एजेंसी या विदेशी शक्तियों के दबाव में आने से इनकार कर दिया था। द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, ओमर ने सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा, “आपने ही उसे मरवाया है और अब इसी मुद्दे की आड़ में आप चुनाव बिगाड़ने की साजिश रच रहे हैं।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि हत्यारों को तुरंत सजा नहीं दी गई, तो डॉ. मोहम्मद यूनुस को भी उसी तरह देश छोड़कर भागना पड़ सकता है जैसे पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भागना पड़ा था। यह तीखा बयान अंतरिम सरकार की कार्यप्रणाली और कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

मस्जिद से निकलते समय हुआ था हमला गौरतलब है कि 32 वर्षीय उस्मान हादी पर उस समय जानलेवा हमला हुआ था जब वे ढाका की एक मस्जिद से नमाज पढ़कर बाहर निकल रहे थे। हमलावरों ने उन्हें निशाना बनाकर गोली मारी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सिंगापुर ले जाया गया था। वहां 19 दिसंबर को उन्होंने दम तोड़ दिया। उस्मान हादी की मौत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे उस छात्र आंदोलन का प्रमुख चेहरा थे जिसने अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार का तख्तापलट किया था। अब उनकी हत्या ने आंदोलनकारियों और वर्तमान सरकार के बीच एक बड़ी खाई पैदा कर दी है।

राजधानी ढाका में इस समय सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और छात्र संगठनों में भारी रोष देखा जा रहा है। उस्मान हादी आगामी चुनावों में एक मजबूत उम्मीदवार के तौर पर देखे जा रहे थे। उनकी हत्या ने न केवल चुनावी निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, बल्कि बांग्लादेश के भविष्य को एक बार फिर अनिश्चितता की ओर धकेल दिया है।

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