
यूनिक समय, नई दिल्ली। बिहार में इस साल 2025 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। इस बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने चुनाव बहिष्कार की संभावना जताकर सियासी हलचल तेज कर दी है। उन्होंने कहा कि अगर मतदाता ही वोट नहीं देंगे, तो चुनाव का क्या औचित्य रह जाएगा?
SIR पर गहरा ऐतराज
तेजस्वी यादव ने राज्य में चल रहे एसआईआर (स्पेशल सर्वे ऑफ इंडिविजुअल्स) को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि मतदाता सूची से लाखों नामों को जानबूझकर हटाया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया, “जब ये वही वोटर्स थे जिन्होंने पिछली सरकारें चुनी थीं, तो अब उनके नाम क्यों काटे जा रहे हैं?”
“जब सब तय है तो चुनाव क्यों?”
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि अगर पहले से ही चुनाव में धांधली की योजना है, तो विपक्ष के लिए चुनाव में हिस्सा लेने का क्या औचित्य है? उन्होंने कहा, “जब खुद सत्ता पक्ष के लोग कह रहे हैं कि फर्जी तरीके से चुनकर आए हैं और आगे भी ऐसा ही करेंगे, तो हम चुनाव बहिष्कार पर गंभीरता से विचार कर सकते हैं।”
महागठबंधन में चर्चा की तैयारी
तेजस्वी यादव ने साफ किया कि वे महागठबंधन के अन्य दलों से इस मुद्दे पर बात करेंगे और एक साझा रणनीति बनाई जाएगी। उन्होंने कहा, “जब चंडीगढ़ जैसी स्थिति बना दी जाएगी, जहां लोकतंत्र केवल दिखावे का रह जाए, तो चुनाव लड़ने का कोई मतलब नहीं रह जाता।”
चुनाव आयोग पर भी उठे सवाल
एसआईआर की प्रक्रिया और आधार कार्ड से लिंकिंग को लेकर भी तेजस्वी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “सुप्रीम कोर्ट की सलाह को दरकिनार किया जा रहा है और सरकार व आयोग के बीच मिलीभगत नजर आ रही है। असली खेला तो 1 अगस्त के बाद होगा।”
तेजस्वी यादव के इस बयान से साफ है कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ आ सकता है। चुनाव बहिष्कार जैसे गंभीर विकल्प पर चर्चा इस बात का संकेत है कि विपक्ष अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है।
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