Breaking News: पद्मश्री विजेता विज्ञापन गुरू पीयूष पांडे का 70 वर्ष की आयु में निधन

पीयूष पांडे का निधन

यूनिक समय, नई दिल्ली। विज्ञापन जगत के दिग्गज और पद्मश्री से सम्मानित पीयूष पांडे का गुरुवार, 23 अक्टूबर को मुंबई में 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी आज सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वे गंभीर संक्रमण से जूझ रहे थे। उनका अंतिम संस्कार आज मुंबई में किया जाएगा।

करियर और योगदान:

पीयूष पांडे का जन्म 1955 में जयपुर, राजस्थान में हुआ था। उन्होंने 27 साल की उम्र में 1982 में अपने भाई प्रसून पांडे के साथ विज्ञापन जगत में कदम रखा और ओगिल्वी (Ogilvy) कंपनी से जुड़े। विज्ञापन की दुनिया में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए उन्हें 2016 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्हें 2024 में LIA लीजेंड अवॉर्ड भी मिला था।

पीयूष पांडे के मशहूर कैंपेन और स्लोगन:

पीयूष पांडे ने कई यादगार विज्ञापन कैंपेन डिजाइन किए, जो भारतीय संस्कृति और जनमानस से सीधे जुड़े:

राजनीतिक स्लोगन: 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का मशहूर नारा “अबकी बार मोदी सरकार” पीयूष पांडे ने ही लिखा था। उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में बताया था कि उन्होंने यह लाइन आम बोलचाल की भाषा में लिखी थी ताकि लोग आसानी से कनेक्ट हो सकें।

राष्ट्रीय गीत: उन्होंने दूरदर्शन के लिए लोकप्रिय एकता गीत “मिले सुर मेरा तुम्हारा” भी लिखा था।

फेविकॉल का ऐड: 2007 में आया “ट्रक वाला विज्ञापन” जिसने एक साधारण गोंद को ‘फेविकोल’ में बदल दिया।

कैडबरी का विज्ञापन: 2007 का “क्रिकेट वाला विज्ञापन” जिसकी टैगलाइन थी “कुछ खास है जिंदगी में!”।

एशियन पेंट्स: 2002 का भावुक विज्ञापन जिसकी टैगलाइन “हर घर कुछ कहता है” ने लाखों घरों को छुआ।

पल्स पोलियो: उन्होंने ‘दो बूंदें जिंदगी की’ जैसे राष्ट्रीय महत्व के अभियान का विज्ञापन भी बनाया था।

पीयूष पांडे ने ‘हच (वोडाफोन) का पग वाला विज्ञापन’ समेत कई सफल कैंपेन डिजाइन किए, जिससे ब्रांड्स को एक नई पहचान मिली।

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