
यूनिक समय, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर रेंज में सुरक्षाबलों ने नए साल की शुरुआत में ही माओवादियों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। बीजापुर और सुकमा जिलों की सीमावर्ती इलाकों में चली घंटों की मुठभेड़ में जवानों ने 14 माओवादी को मार गिराया है। मारे गए नक्सलियों के पास से एके-47, आईएनएसएएस और एसएलआर जैसे घातक और अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा बरामद हुआ है। इस ऑपरेशन को बस्तर से नक्सलवाद के सफाए की दिशा में एक ऐतिहासिक सफलता माना जा रहा है।
दो जिलों में एक साथ ऑपरेशन
सशस्त्र नक्सलियों की मौजूदगी की सटीक खुफिया जानकारी मिलने के बाद दक्षिण बस्तर के सुदूर जंगलों में डीआरजी (DRG) की विशेष टीमों को उतारा गया था। यहाँ सुबह 5 बजे से ही गोलियों की गड़गड़ाहट शुरू हो गई, जहाँ जवानों ने 2 नक्सलियों को ढेर कर दिया। सुकमा में मुठभेड़ और भी भीषण रही, जहाँ सुबह 8 बजे से जारी फायरिंग के बीच अब तक 12 नक्सलियों के शव बरामद किए जा चुके हैं। सूत्रों का कहना है कि यह संख्या अभी और बढ़ सकती है क्योंकि इलाके में रुक-रुक कर फायरिंग जारी है।
एएसपी आकाश राव के हत्यारों का हुआ ‘हिसाब’
इस ऑपरेशन की सबसे बड़ी सफलता यह है कि मारे गए 14 माओवादी में वे चेहरे भी शामिल बताए जा रहे हैं, जो अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) आकाश राव की हत्या की साजिश और हमले में संलिप्त थे। सूत्रों के मुताबिक, नक्सलियों के बड़े कमांडर मंगडु के भी इस मुठभेड़ में मारे जाने की प्रबल आशंका है। कोन्टा एरिया कमेटी के एसीएम हितेश की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जो इलाके में कई बड़ी वारदातों का मास्टरमाइंड था।
एसपी किरण चव्हाण के नेतृत्व में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
इस पूरे ऑपरेशन की कमान खुद सुकमा के एसपी किरण चव्हाण संभाल रहे थे। सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में गोला-बारूद, विस्फोटक सामग्री और दैनिक उपयोग का सामान जब्त किया है। बस्तर रेंज के जंगलों में अभी भी सघन तलाशी अभियान (Search Operation) जारी है ताकि छिपे हुए अन्य नक्सलियों को भी पकड़ा जा सके। गृह मंत्रालय और राज्य सरकार ने इस बड़ी सफलता के लिए जवानों के साहस की सराहना की है।
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