
यूनिक समय, नई दिल्ली। द्वितीय विश्व युद्ध की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर चीन ने एक भव्य सैन्य परेड का आयोजन किया। इस परेड में चीन ने अपनी नई और उन्नत सैन्य तकनीक का प्रदर्शन किया, जिसमें मिसाइलें, लड़ाकू विमान और अत्याधुनिक ड्रोन शामिल थे। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस परेड की अगुवाई की, जिसमें लगभग दो दर्जन विदेशी नेता भी मौजूद थे।
प्रमुख नए हथियार जो पहली बार दिखे
सैन्य परेड में कई ऐसे हथियार दिखाए गए जो पहली बार सार्वजनिक हुए हैं। इनमें जमीन, समुद्र और हवा में इस्तेमाल होने वाली मिसाइलें, ड्रोन और सटीक निशाना लगाने वाले हथियार शामिल थे। इनमें सबसे प्रमुख थे:
DF-5C इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल
इसकी रेंज 13,000 किलोमीटर से अधिक है और यह एक साथ 10 स्वतंत्र निशाने साध सकती है।
HQ-29 एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल
इसे अंतरिक्ष में बैलिस्टिक मिसाइलों और उपग्रहों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है, जो चीन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम का एक अहम हिस्सा है।
J-35 स्टील्थ फाइटर
इसे चीन का सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर माना जा रहा है।
KJ-600 AWACS विमान
यह चीन का पहला कैरियर-बेस्ड AWACS विमान है और 1,200 किलोमीटर तक की निगरानी कर सकता है।
ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों का प्रदर्शन
इस परेड में AI-आधारित ड्रोन और मानवरहित प्रणालियों पर भी ज़ोर दिया गया। इनमें टोही और हमला करने वाले ड्रोन, मानवरहित विंगमैन और नौसेना के हेलीकॉप्टर शामिल थे।
इसके अलावा, परेड में DF-26D और YJ-15 जैसी मिसाइलें भी नज़र आईं। DF-26D की रेंज 5,000 किलोमीटर है और यह न्यूक्लियर और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जा सकती है। YJ-15 को ‘कैरियर किलर’ कहा जाता है, जो दुश्मन के जहाजों पर तेज हमला करने के लिए बनाई गई है।
टाइप 99B टैंक और PHL-16 रॉकेट लॉन्चर भी दिखाए गए। PHL-16 को ताइवान स्ट्रेट में लंबी दूरी के हमलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इसे अमेरिका के हिमार्स सिस्टम जैसा बताया गया है। चीन ने इस परेड के माध्यम से अपनी बढ़ती हुई सैन्य शक्ति का संदेश दिया।
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