
यूनिक समय, नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक तुर्कमान गेट इलाके में फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास किए गए भारी अवैध अतिक्रमण को दिल्ली नगर निगम (MCD) ने पूरी तरह ढहा दिया है। मंगलवार रात हुए पथराव और हंगामे के बाद प्रशासन अब कोई जोखिम नहीं उठाना चाहता। इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNS) की धारा-163 लागू कर दी गई है और सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए गए हैं कि पूरा इलाका छावनी में तब्दील नजर आ रहा है।
जुमे की नमाज के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। मस्जिद के मलबे को हटा दिया गया है, लेकिन तनाव को देखते हुए आज आम लोगों को फैज-ए-इलाही मस्जिद में नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं दी गई है। पुलिस ने स्थानीय पीस कमेटी और धर्मगुरुओं के माध्यम से अपील की है कि लोग कानून-व्यवस्था बनाए रखें और अपने घर के पास की मस्जिदों में ही नमाज अदा करें।
रैपिड एक्शन फोर्स और ‘वज्र’ की तैनाती
सुरक्षा की दृष्टि से तुर्कमान गेट की हर गली और नुक्कड़ पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की डेल्टा/103 बटालियन के जवान तैनात किए गए हैं। दंगा नियंत्रण वाहन ‘वज्र’ को भी मौके पर मुस्तैद रखा गया है। पुलिस ड्रोन और सोशल मीडिया के जरिए उपद्रवी तत्वों पर पैनी नजर रख रही है। तनावपूर्ण शांति के बीच तुर्कमान गेट के आसपास के बाजार आज भी बंद रहे, जिससे व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।
क्या था विवाद और हाईकोर्ट का आदेश?
यह पूरा मामला दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें मस्जिद के पास बने निर्माण को अवैध करार दिया गया था। कोर्ट ने ‘सेव इंडिया फाउंडेशन’ की याचिका पर सुनवाई करते हुए पाया कि मस्जिद के पास लगभग 39 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में अवैध कब्जा था। 12 नवंबर को हाईकोर्ट ने एमसीडी को इसे हटाने के लिए तीन महीने का समय दिया था।
मंगलवार रात जब प्रशासन अतिक्रमण हटाने पहुंचा, तो अचानक भीड़ ने विरोध प्रदर्शन और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया था। स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसके बाद से इलाके में कड़ा पहरा लगा हुआ है। प्रशासन का कहना है कि वे केवल न्यायालय के आदेश का पालन कर रहे हैं।
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