
यूनिक समय, नई दिल्ली। पड़ोसी देश बांग्लादेश में 17 वर्षों के लंबे राजनीतिक वनवास और उथल-पुथल के बाद एक बड़े सत्ता परिवर्तन की तस्वीर साफ हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान के नेतृत्व में पार्टी ने आम चुनाव में ऐतिहासिक बहुमत हासिल किया है। इस बड़ी जीत के साथ ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को हार्दिक बधाई दी है, जिसे दोनों देशों के भविष्य के संबंधों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत माना जा रहा है।
पीएम मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर तारिक रहमान को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि चुनाव में मिली यह शानदार जीत बांग्लादेश की जनता का उनके नेतृत्व पर अटूट विश्वास और भरोसे को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। अपने शुभकामना संदेश में पीएम मोदी ने तीन प्रमुख स्तंभों पर जोर देते हुए स्पष्ट किया कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के समर्थन में हमेशा मजबूती के साथ खड़ा रहेगा। इसके साथ ही उन्होंने दोनों देशों के साझा विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में नई सरकार के साथ मिलकर काम करने की गहरी उत्सुकता जाहिर की। प्रधानमंत्री ने भारत और बांग्लादेश के बीच सदियों पुराने बहुआयामी संबंधों को भविष्य में और अधिक प्रगाढ़ और सशक्त बनाने की अपनी कूटनीतिक प्रतिबद्धता को भी प्रमुखता से दोहराया।
चुनावी आंकड़े
ताजा मतगणना के अनुसार, तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी ने अब तक 212 सीटों पर जीत दर्ज कर स्पष्ट बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है। उनके सहयोगी दल ‘जमात’ ने भी 70 सीटों पर कब्जा जमाया है। इन नतीजों के साथ ही तारिक रहमान का बांग्लादेश का अगला प्रधानमंत्री बनना तय हो गया है। 17 साल बाद वतन वापसी और फिर इस तरह की भारी जीत ने बांग्लादेश की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत कर दी है।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
बांग्लादेश के चुनावी नतीजे नई दिल्ली के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पिछले कई वर्षों से भारत समर्थक मानी जाने वाली शेख हसीना की ‘आवामी लीग’ सत्ता में थी, लेकिन इस बार उन्हें चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। ऐसे में एक बिल्कुल नई लीडरशिप के साथ तालमेल बिठाना भारत के लिए कूटनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण और अवसरवादी दोनों है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पीएम मोदी की यह त्वरित बधाई ढाका की नई सत्ता के साथ विश्वास बहाली (Confidence Building) की दिशा में पहला और बड़ा कदम है। भारत की नजर अब इस बात पर है कि नई सरकार के तहत सुरक्षा, कनेक्टिविटी और व्यापारिक समझौते किस दिशा में आगे बढ़ते हैं।
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