Ganesh Chaturthi 2025: आज गणेश चतुर्थी पर बन रहे है कई दुलर्भ संयोग; जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

गणेश चतुर्थी पर बन रहे है कई दुलर्भ संयोग

यूनिक समय, नई दिल्ली। आज, 27 अगस्त, बुधवार को गणेश चतुर्थी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। इस साल गणेश चतुर्थी पर चित्रा नक्षत्र, बुधवार, सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग का शुभ संयोग बन रहा है, जो इसकी महत्ता को और बढ़ा रहा है। हालांकि, भद्राकाल सुबह 5:57 बजे से शुरू हो गया है, गणेश चतुर्थी के दिन भद्रा सुबह 05 बजकर 57 मिनट से दोपहर 03 बजकर 44 मिनट तक रहेगी। हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, भद्राकाल में पूजा-पाठ व शुभ कार्यों की मनाही है।

गणेश पूजा के लिए शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की मूर्ति स्थापना और पूजन के लिए कई शुभ मुहूर्त हैं:

  • पहला शुभ मुहूर्त: सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक। यह मध्याह्न मुहूर्त है, जो गणेश जी की पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
  • दूसरा शुभ मुहूर्त: दोपहर 2:31 बजे से दोपहर 3:22 बजे तक। इस दौरान विजय मुहूर्त रहेगा, जिसमें किए गए कार्यों में सफलता मिलती है।
  • अन्य मुहूर्त: सर्वार्थ सिद्धि और रवि योग सुबह 5:57 बजे से सुबह 6:04 बजे तक है। शाम के समय पूजा के लिए गोधूलि बेला का मुहूर्त शाम 6:48 बजे से शाम 7:10 बजे तक रहेगा।

गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व और पूजा विधि

गणेश चतुर्थी का पर्व भाद्रपद मास की शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा घर लाकर उन्हें स्थापित करते हैं और विधि-विधान से पूजा करते हैं। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और शुभ कार्यों के देवता के रूप में पूजा जाता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि किसी भी कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के नाम से करने पर सभी बाधाएं दूर होती हैं।

पूजा विधि:

  • स्नान और तैयारी: सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा की सामग्री (फूल, मोदक, अगरबत्ती आदि) तैयार रखें।
  • मूर्ति स्थापना: घर के एक साफ-सुथरे स्थान पर गणेश जी की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें।
  • संकल्प और पूजा: पूजा शुरू करने से पहले संकल्प लें। दीपक जलाएं, फूल और भोग अर्पित करें।
  • मंत्र जाप और आरती: “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें। सुबह और शाम गणेश जी की आरती करें।
  • व्रत और प्रसाद: पूजा के बाद प्रसाद ग्रहण करें और अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें।

गणेश चतुर्थी का यह उत्सव 1 से 11 दिनों तक चलता है, जिसके बाद विधि-विधान से गणेश जी की मूर्ति का विसर्जन किया जाता है।

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