
यूनिक समय, नई दिल्ली। कीमती धातुओं के बाजार में शनिवार, 31 जनवरी 2026 को वह ऐतिहासिक गिरावट देखी गई, जिसने पूरी दुनिया के निवेशकों को हिलाकर रख दिया है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर पिछले कुछ दिनों से जारी ‘धमाल’ अब निवेशकों के लिए ‘दर्द’ में बदल गया है। गुरुवार को रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छूने वाले सोने और चांदी की कीमतों में ऐसी भारी गिरावट आई है, जिसे बाजार के जानकार ‘महा-क्रैश’ कह रहे हैं।
चांदी में ₹1.29 लाख की ऐतिहासिक गिरावट
चांदी के बाजार के लिए यह शनिवार एक ‘ब्लैक सैटरडे’ साबित हुआ, क्योंकि इसकी कीमतों में ₹1.29 लाख की ऐसी ऐतिहासिक गिरावट आई है जिसे अब तक के सबसे बड़े बाजार सुधारों में से एक माना जा रहा है। चांदी की कीमतें महज 24 घंटों के भीतर अर्श से फर्श पर आ गिरीं; जहाँ गुरुवार को MCX पर इसने ₹4,20,000 प्रति किलो का अपना ऐतिहासिक शिखर छुआ था, वहीं शनिवार तक यह भारी तबाही के साथ टूटकर ₹2,91,000 प्रति किलो पर आ गई। कीमतों में आई इस अचानक गिरावट का मतलब है कि चांदी के दाम में एक ही दिन के भीतर ₹1,29,000 की रिकॉर्ड कमी दर्ज की गई है, जिसने निवेशकों और सर्राफा व्यापारियों को स्तब्ध कर दिया है।
सोने की चमक भी हुई फीकी
सोने की कीमतों में शनिवार को आई भारी गिरावट ने बाजार में हलचल पैदा कर दी है, जहाँ आसमान छू रहे दाम अब एक झटके में जमीन पर आते दिख रहे हैं। कभी ₹1,80,000 प्रति 10 ग्राम के जादुई आंकड़े के बेहद करीब पहुँच चुका सोना, रिकॉर्ड गिरावट के साथ अब ₹1,50,849 पर आ गया है। इस तरह एक ही झटके में सोने के भाव में लगभग ₹30,000 प्रति 10 ग्राम की बड़ी कमी दर्ज की गई है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार (COMEX) का हाल
सोने-चांदी की कीमतों में आई यह भारी गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं में जबरदस्त बिकवाली (Sell-off) का दौर देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर सिल्वर रेट अपने $119 प्रति औन्स के उच्चतम स्तर से गिरकर अब $85.250 पर आ चुका है, जो वैश्विक मांग में आई अचानक कमी को दर्शाता है। इसी तरह, गोल्ड रेट भी $5,500 प्रति औन्स के ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने के बाद अब $4,879.60 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जिससे स्पष्ट है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के बजाय मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
बाजार के जानकारों का मानना है कि सोने-चांदी की कीमतों में आई इस भारी गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक और तकनीकी कारक एक साथ सक्रिय हुए हैं। सबसे प्रमुख कारण मुनाफावसूली (Profit Booking) रहा, जहाँ रिकॉर्ड ऊंचे भाव पर पहुँचने के बाद निवेशकों ने अपनी पोजीशन काटकर जमकर बिकवाली की, जिससे कीमतों पर दबाव बढ़ गया।
साथ ही, अमेरिकी फैक्टर ने भी अहम भूमिका निभाई; अमेरिकी डॉलर में आई मजबूती और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के संकेतों ने बाजार का सेंटिमेंट पूरी तरह बदल दिया। इसके अतिरिक्त, जहाँ रॉबर्ट कियोसाकी जैसे दिग्गज निवेशकों ने साल 2026 में बड़ी तेजी की भविष्यवाणी की थी, वहीं मोतीलाल ओसवाल जैसी प्रमुख ब्रोकरेज फर्म्स ने पहले ही अत्यधिक खरीद (Overbought) की स्थिति को देखते हुए बड़ी मासिक गिरावट की आशंका जता दी थी।
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