
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका ने H-1B वीजा को लेकर अपने नियमों में सुधार करते हुए हजारों भारतीय प्रोफेशनल्स और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को बड़ी राहत दी है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका में रहते हुए H-1B वीजा के लिए अंतर्राष्ट्रीय ग्रेजुएट्स को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले महीने घोषित की गई $100,000 (एक लाख डॉलर) की भारी फीस का भुगतान नहीं करना होगा।
USCIS के नए दिशानिर्देशों की मुख्य बातें:
USCIS के नए दिशानिर्देश के अनुसार, यह $100,000 की फीस उन किसी भी व्यक्ति पर लागू नहीं होगी जो पहले से ही अमेरिका में वैध वीजा पर रह रहे हैं। इनमें F-1 स्टूडेंट वीजा धारक जो H-1B के लिए आवेदन कर रहे हैं, L-1 इंट्रा-कंपनी ट्रांसफरी और अपने वीजा को रीन्यूअल या एक्सटेंशन कराने वाले वर्तमान H1B वीजा धारक शामिल हैं।
अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा ने स्पष्ट किया कि यह घोषणा “पहले जारी किए गए और वर्तमान में वैध H-1B वीजा, या 21 सितंबर, 2025 को सुबह 12:01 बजे पूर्वी मानक समय से पहले प्रस्तुत की गई किसी भी याचिका पर लागू नहीं होती है।” USCIS ने यह भी स्पष्ट किया कि H-1B वीजा धारक बिना किसी प्रतिबंध के अमेरिका में आना-जाना जारी रख सकते हैं, जिससे फीस घोषणा के बाद पैदा हुई सबसे बड़ी चिंता दूर हो गई है।
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवा (यूएससीआईएस) ने आगे पुष्टि की है कि मौजूदा विदेशी नागरिक जो अपनी स्थिति में बदलाव के लिए आवेदन कर रहे हैं, जैसे कि एफ-1 वीज़ा पर एच-1बी नौकरियों में बदलाव करने वाले अंतर्राष्ट्रीय छात्र, उन्हें 100,000 अमेरिकी डॉलर का नया शुल्क नहीं देना होगा। यह घोषणा भारतीय तकनीकी पेशेवरों के लिए एक बड़ी राहत है, जो एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम की रीढ़ हैं।
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