नई दिल्ली। 12 दिसंबर से ही असम में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर हंगामा मचा हुआ है। देश के इस हिस्से में ही इस कानून को लेकर सबसे पहले विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत हुई थी। अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक गृहमंत्री अमित शाह राज्य की सरकार से खासे नाराज हैं। राज्य में बीजेपी सत्ताधारी पार्टी है और सर्बानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री हैं। आपको बता दें कि पिछले ही हफ्ते यह कानून लोकसभा और राज्यसभा से पास हुआ और फिर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इस पर साइन करके इसे अपनी मंजूरी दी है।
ऑफिसर्स पहुंचे शाह के घर
12 दिसंबर को देर रात करीब दो बजे गृह मंत्री अमित शाह ने तपन डेका को बुलाया। डेका इस समय मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) के एडीशनल डायरेक्टर हैं। डेका के अलावा शाह ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के इंस्पेक्टर जनरल जीपी सिंह को भी बुलावा भेजा। राज्यसभा में बिल के पास होने के कुछ ही घंटों के बाद शाह ने ऑफिसर्स को अपने घर पर बुलाया था। कुछ घंटों बाद ही राष्ट्रपति ने इस बिल पर साइन कर दिए और बिल एक कानून के तौर पर तब्दील हो गया।
राज्य सरकार से नाराज शाह
इसी बीच असम के गुवाहाटी और डिब्रूगढ़ सें हिंसा और आगजनी की खबरें आने लगीं। इन खबरों के बाद गृह सचिव अजय भल्ला और इंटेलीजेंस ब्यूरों (आईबी) के डायरेक्टर अरविंद कुमार को असम में हिंसा काबू में करने के का फैसला गृह मंत्री ने लिया। दोनों ही असम कैडर के ऑफिसर्स हैं। शाह इस बात से खासे नाराज थे कि सोनोवाल की अगुवाई वाली राज्य सरकार ने हिंसा को ज्यादा तवज्जो नहीं दी।
कौन हैं तपन डेका और जीपी सिंह
डेका को असम में आतंकवाद को काबू में करने वाला टॉप ऑफिसर माना जाता है। डेका, ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) के नेता भी रह चुके हैं। डेका के अलावा सिंह के पास भी इस क्षेत्र में कानून व्यवस्था को काबू में करने की महारत हासिल है। दोनों को सुबह चार बजे स्पेशल फ्लाइट से गुवाहाटी भेजा गया था।
पीएम मोदी ने फैसले को बताया सही
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी रैली में कहा है कि कि नागरिकता संशोधन कानून को लागू करने का फैसला ‘1,000 प्रतिशत’ सही था। वहीं पीएम मोदी ने नॉर्थ-ईस्ट में हिंसा के लिए कांग्रेस को दोष दिया है। साथ ही उन्होंने राज्य की जनता की भी तारीफ की है। उन्होंने कहा है कि असम के लोग शांतिपूर्ण तरीके से अपना मत रख रहे हैं।
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