
यूनिक समय, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान सीजेआई (CJI) सूर्यकांत का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। अदालत ने एक वकील द्वारा दायर याचिका को न केवल ‘बेबुनियाद’ और ‘दिमाग न लगाने का उदाहरण’ बताया, बल्कि भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी दे डाली। सीजेआई ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पर बोझ डालने और ‘अपनी दुकान चलाने’ का जरिया बन गई हैं।
शराब और ‘तामसिक भोजन’ पर नियम बनाने की थी मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक वकील द्वारा व्यक्तिगत रूप से दायर की गई जनहित याचिका में शराब की बिक्री के लिए ‘तय मात्रा का प्रिस्क्रिप्शन’ अनिवार्य करने और ‘तामसिक भोजन’ व प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन जैसे मुद्दों पर नियम बनाने की अजीबोगरीब मांगें की गई थीं।
इन अस्पष्ट मांगों और खराब ड्राफ्टिंग को देखकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत काफी नाराज हो गए और उन्होंने तल्ख टिप्पणी करते हुए वकील से पूछा कि क्या वह ऐसी याचिकाएं आधी रात को ड्राफ्ट करते हैं। बेंच ने इस याचिका को ‘कैजुअल अप्रोच’ और अदालती समय की बर्बादी का एक बड़ा उदाहरण बताते हुए इसे पूरी तरह बेबुनियाद करार दिया।
हालांकि, याचिकाकर्ता के वकील होने के नाते कोर्ट ने इस बार उन पर कोई जुर्माना नहीं लगाया, लेकिन भविष्य के लिए सख्त चेतावनी दी कि अगली बार ऐसी आधारहीन याचिका दायर करने पर भारी हर्जाना (Exemplary Costs) वसूला जाएगा।
“दुकानें चला रखी हैं आप लोगों ने”
सुनवाई के दौरान बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि कई लोग बिना सोचे-समझे ऐसी याचिकाएं दायर कर देते हैं जिनकी मांगें ही साफ नहीं होतीं। सीजेआई ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा, “तुम लोगों ने ऐसी बहुत दुकानें चला रखी हैं।” कोर्ट ने आदेश में दर्ज किया कि याचिका की ड्राफ्टिंग बेहद खराब है और यह न्यायपालिका के समय का दुरुपयोग है।
अदालत ने याचिकाकर्ता को छूट दी कि यदि कोई वैध कानूनी मुद्दा है, तो वह संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट में ऐसी अपरिपक्व दलीलों के लिए कोई जगह नहीं है।
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