India News: लोकसभा में “जी-राम-जी” बिल पास; कांग्रेस पर ‘खानदान’ के महिमामंडन और लोकतंत्र के अपमान का लगा आरोप

लोकसभा में जी-राम-जी बिल पास

यूनिक समय, नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र के 14वें दिन सदन का माहौल गरमाया रहा। एक ओर जहाँ दिल्ली-एनसीआर में गंभीर वायु प्रदूषण पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा, डीएमके की कनिमोझी और भाजपा की बांसुरी स्वराज ने चर्चा की, वहीं दूसरी ओर ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ विधेयक (G-RAM-G Bill) को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई। भारी विरोध के बावजूद यह महत्वपूर्ण विधेयक गुरुवार को सदन से पास हो गया।

“जवाब न सुनना बापू के आदर्शों की हत्या”

विपक्षी दलों के हंगामे और वॉकआउट के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मोर्चा संभाला। उन्होंने विपक्ष के व्यवहार को ‘अलोकतांत्रिक’ करार देते हुए कहा, “मैंने रात के डेढ़ बजे तक माननीय सदस्यों की बात सुनी है, लेकिन अब जब जवाब देने की मेरी बारी है, तो विपक्ष सदन छोड़कर भाग रहा है। अपनी बात कहना और दूसरे की न सुनना लोकतांत्रिक परंपराओं को तार-तार करना और बापू के आदर्शों की हत्या के समान है।” उन्होंने इसे वैचारिक हिंसा बताते हुए सभापति से संरक्षण की मांग की।

गांधीवादी दर्शन और ग्रामीण भारत का विकास

शिवराज सिंह चौहान ने महात्मा गांधी को नमन करते हुए कहा कि बापू हमारी श्रद्धा हैं। बापू जी हमारे आदर्श हैं। बापू हमारी प्रेरणा हैं। बापू हमारे विश्वास हैं। भाजपा की ‘पंच निष्ठाओं’ में गांधी जी का सामाजिक-आर्थिक दर्शन समाहित है। उन्होंने कहा, “बापू ने कहा था कि गांव भारत की आत्मा हैं। यह विधेयक गांवों के विकास और किसानों के कल्याण के लिए समर्पित है। अगर गांव समृद्ध होंगे, तभी भारत समृद्ध होगा।”

भेदभाव के आरोपों पर ‘अटल’ प्रहार

राज्यों के साथ भेदभाव के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कृषि मंत्री ने अटल बिहारी वाजपेयी के शब्दों को दोहराया। उन्होंने कहा “चेन्नई हो या गुवाहाटी, अपना देश अपनी माटी। हमारे लिए यह देश केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि एक जीता-जागता राष्ट्र पुरुष है। हम किसी राज्य के साथ पक्षपात नहीं करते।”

नेहरू-गांधी परिवार पर तीखा हमला

कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी की टिप्पणियों का जवाब देते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर ‘एक खानदान’ के महिमामंडन में लिप्त होने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने आंकड़ों के साथ दावा किया कि 25 सरकारी योजनाओं के नाम स्वर्गीय राजीव गांधी के नाम पर हैं। 27 योजनाओं के नाम इंदिरा गांधी के नाम पर रखे गए। सड़कों, भवनों, पुरस्कारों और संस्थानों के नाम पर भी केवल नेहरू-परिवार का कब्जा रहा, जबकि महात्मा गांधी के नाम की अनदेखी की गई।

संसद का यह 15 दिवसीय शीतकालीन सत्र कल 19 दिसंबर को समाप्त होगा। सत्र के आखिरी दिन भी प्रदूषण और अन्य लंबित मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। जी-राम-जी बिल का पास होना सरकार के लिए एक बड़ी विधायी जीत मानी जा रही है, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लक्ष्य से प्रेरित है।

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