
यूनिक समय, नई दिल्ली। नए साल 2026 के आगाज़ के साथ ही धर्म की नगरी प्रयागराज में दुनिया का सबसे बड़ा आध्यात्मिक जमावड़ा शुरू हो गया है। आज पौष पूर्णिमा के पावन अवसर पर त्रिवेणी संगम के तट पर लाखों श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर गंगे’ के जयघोष के साथ आस्था की डुबकी लगाई। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 को ‘सूर्य का वर्ष’ माना जा रहा है, जिससे इस बार के माघ मेले में तप, दान और साधना का महत्व कई गुना बढ़ गया है।
शुरू हुआ 40 दिवसीय ‘कल्पवास’ का कठिन व्रत
माघ मेले की सबसे अनूठी परंपरा ‘कल्पवास’ का आज से श्रीगणेश हो गया है। संगम की रेती पर तंबुओं का शहर बस चुका है, जहाँ हजारों कल्पवासी आगामी 40 दिनों तक साधना करेंगे। कल्पवासी इस दौरान भूमि पर शयन करेंगे, दिन में केवल एक बार सात्विक भोजन लेंगे और ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर निरंतर जप-तप में लीन रहेंगे। शास्त्रों के अनुसार, एक माह का कल्पवास हजारों वर्षों की तपस्या के समान पुण्य फलदायी होता है, जो मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है।
माघ मेला 2026: प्रमुख स्नान तिथियां
प्रयागराज का यह धार्मिक उत्सव आज से शुरू होकर 15 फरवरी तक चलेगा। श्रद्धालु इन मुख्य तिथियों पर पुण्य लाभ कमा सकते हैं:
3 जनवरी – पौष पूर्णिमा (कल्पवास आरंभ)
14 जनवरी – मकर संक्रांति
21 जनवरी – मौनी अमावस्या (राजयोग स्नान)
30 जनवरी – बसंत पंचमी
5 फरवरी – माघी पूर्णिमा
15 फरवरी – महाशिवरात्रि (कल्पवास समापन)
ज्योतिषीय महत्व:
खगोलविदों और ज्योतिषियों के अनुसार, वर्ष 2026 के अंकों का योग ‘सूर्य’ (अंक 1) के प्रभाव को दर्शाता है। सूर्य को आत्मा और तेज का कारक माना जाता है, इसलिए इस वर्ष माघ स्नान से न केवल शारीरिक व्याधियों से मुक्ति मिलेगी, बल्कि मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का भी संचार होगा। संगम के तट पर संतों के प्रवचन, यज्ञ और भजन-कीर्तन से पूरा वातावरण दिव्य ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया है।
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