
यूनिक समय, नई दिल्ली। असम की राजनीति में आज एक बड़ा भूचाल आ गया है। कांग्रेस के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक और नागांव से लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की सदस्यता ग्रहण कर ली है। राजधानी दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में बोरदोलोई ने केसरिया पटका पहना। 1975 से कांग्रेस के साथ जुड़े रहे बोरदोलोई का जाना पार्टी के लिए एक युग के अंत जैसा माना जा रहा है।
हिमंता का मिशन ‘कांग्रेस मुक्त असम’ तेज
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के बीजेपी में शामिल होने को पार्टी के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि बोरदोलोई जैसे अनुभवी नेता के आने से प्रदेश में पार्टी की जड़ें और भी ज्यादा मजबूत होंगी। सीएम ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि यदि किसी नेता के आत्मसम्मान के लिए वहां जगह नहीं बची है, तो ऐसी पार्टी में रुकने का कोई मतलब नहीं रह जाता है।
उन्होंने अपना लक्ष्य स्पष्ट करते हुए कहा कि आने वाले समय में वे और भी कई योग्य कांग्रेस नेताओं को बीजेपी के साथ जोड़ेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि पार्टी केंद्रीय नेतृत्व से बोरदोलोई को आगामी विधानसभा चुनाव लड़ाने की सिफारिश करेगी, जिससे यह साफ है कि उन्हें राज्य की राजनीति में कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
प्रद्युत बोरदोलोई ने कल ही कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को अपना एक लाइन का इस्तीफा भेजा था। उनके इस्तीफे के महज 24 घंटे के भीतर बीजेपी में शामिल होने की खबर ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस पूरी जॉइनिंग की पटकथा खुद सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने तैयार की थी, जो पिछले कुछ समय से बोरदोलोई के संपर्क में थे।
नवज्योति तालुकदार भी कतार में
झटका सिर्फ बोरदोलोई तक सीमित नहीं है। असम कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष नवज्योति तालुकदार ने भी पार्टी को अलविदा कह दिया है। दिल्ली में मीडिया से बात करते हुए तालुकदार ने साफ किया कि वे आज ही असम पहुँचकर बीजेपी में शामिल होंगे। उन्होंने दावा किया कि प्रद्युत बोरदोलोई के इस कदम के बाद कांग्रेस के कई और वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता पार्टी छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं।
राजनीतिक मायने
प्रद्युत बोरदोलोई का बीजेपी में जाना न केवल नागांव क्षेत्र में कांग्रेस के जनाधार को हिला देगा, बल्कि ऊपरी और मध्य असम में भी पार्टी के सांगठनिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाएगा। विधानसभा चुनाव से पहले इस दलबदल ने बीजेपी के पक्ष में माहौल को और मजबूत कर दिया है।
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