
यूनिक समय, नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तकरार अब एक अभूतपूर्व मोड़ पर पहुँच गई है। सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर सामने आ रही है कि विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव (No-Confidence Motion) लाने की तैयारी शुरू कर दी है। राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद से ही सदन की कार्यवाही लगातार बाधित हो रही है, लेकिन अब यह मामला केवल हंगामे तक सीमित न रहकर सीधे स्पीकर की निष्पक्षता और कुर्सी पर सवाल उठाने तक पहुँच गया है।
खरगे के आवास पर बनी रणनीति
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी एकजुटता की तस्वीर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर देखने को मिली। यहाँ हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में तमाम विपक्षी दलों के प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया, जहाँ स्पीकर के खिलाफ मोर्चा खोलने की रणनीति पर मुहर लगी। विपक्षी खेमे का मुख्य आरोप है कि सदन के संचालन के दौरान स्पीकर का रवैया ‘भेदभावपूर्ण’ रहा है और उन्हें अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐतिहासिक रार
बजट सत्र के दौरान तल्खी इस कदर बढ़ गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी भारी विरोध का सामना करना पड़ा। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते समय कांग्रेस की महिला सांसदों सहित विपक्ष के कई सदस्यों ने प्रधानमंत्री की सीट का घेराव कर लिया, जिसके कारण उन्हें अपना संबोधन स्थगित करना पड़ा। विपक्ष का तर्क है कि जब वे जनहित के मुद्दे उठाते हैं, तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जाती है और सदन की कार्यवाही एकपक्षीय तरीके से चलाई जाती है।
संवैधानिक प्रक्रिया और नोटिस की तैयारी
सूत्रों के अनुसार, लगभग सभी प्रमुख विपक्षी दल इस बात पर सहमत हैं कि अब लोकसभा महासचिव को औपचारिक रूप से अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया जाए। संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए एक निश्चित प्रक्रिया और नोटिस की आवश्यकता होती है। यदि विपक्ष यह कदम उठाता है, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक लड़ाइयों में से एक होगी।
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