
यूनिक समय, नई दिल्ली। करवा चौथ विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला महत्वपूर्ण व्रत हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को रखा जाता है और इसे कर्क चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत कठिन होता है और महिलाएं सूर्योदय से लेकर रात में चंद्रमा के दर्शन तक अन्न और जल ग्रहण किए बिना निर्जला उपवास रखती हैं। इस बार करवा चौथ का व्रत 10 अक्टूबर, शुक्रवार को रखा जा रहा हैं।
करवा चौथ 2025: तिथि और शुभ मुहूर्त
चतुर्थी तिथि की शुरुआत 9 अक्टूबर की रात 10 बजकर 54 मिनट पर हो चुकी है और इसका समापन 10 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 38 मिनट पर होगा। करवा चौथ के लिए पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 57 मिनट से शाम 7 बजकर 11 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटा 14 मिनट की होगी। वहीं, उपवास रखने का मुहूर्त सुबह 6 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। इस दौरान व्रती महिलाएं माता करवा, माता पार्वती, भगवान गणेश की पूजा और कथा सुनने जैसे सभी कार्य कर सकती हैं।
चंद्रोदय और पूजन विधि
करवा चौथ के दिन चंद्रोदय का समय शाम 8 बजकर 14 मिनट बताया जा रहा है (दिल्ली-एनसीआर में यह रात 8 बजकर 13 मिनट पर हो सकता है)। व्रत शुरू करने के बाद, महिलाएं पूजा के लिए सोलह श्रृंगार करके तैयार होती हैं और दीवार पर करवा माता का चित्र बनाती हैं या लगाती हैं। जमीन पर चावल के आटे में हल्दी मिलाकर चित्र बनाया जाता है, जिसके ऊपर करवा रखा जाता है और उसमें घी का जलता हुआ दीपक रखा जाता है।
करवा में 11 या 21 सींकें लगाई जाती हैं और खील-बताशे, साबुत अनाज आदि डाले जाते हैं। भोग के लिए आटे की पूड़ियां, मीठा हलवा, खीर आदि रखे जाते हैं, साथ ही सोलह श्रृंगार सहित सुहाग की सामग्री भी अवश्य चढ़ाई जाती है। पूजा के दौरान करवा चौथ की व्रत कथा सुनना अनिवार्य है। अंत में, चांद निकलने के बाद छलनी से पहले पति को देखकर फिर चांद के दर्शन किए जाते हैं। चंद्रमा को जल से अर्घ्य देने और पति की लंबी उम्र की कामना के बाद ही महिलाएं भोजन ग्रहण करती हैं।
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