
प्रमुख संवाददाता यूनिक समय, आगरा। प्रदेश के पूर्व परिवहन मंत्री राजा अरिदमन सिंह ने यमुना एक्सप्रेस वे पर गत दिनों थाना बलदेव क्षेत्र में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह को पत्र लिखकर बड़े वाहनों में प्रवेश और निकासी के साथ इमरजेंसी एग्जिट की भी पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने का सुझाव दिया है।
उन्होंने आमदनी से अधिक लोगों की जान को कीमती बताते हुए एक्सप्रेस-वे पर कॉमर्शियल वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित करने की मार्मिक अपील की है। उन्होंने लिखा है कि हर वर्ष सड़क हादसों में सैकड़ों लोग अकाल मृत्यु का ग्रास बन रहे हैं। इन हादसों से घर परिवार तबाह हो रहे हैं। ऐसे में एक्सप्रेस-वे पर कॉमर्शियल वाहनों को पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
लखनऊ और दिल्ली पहुँचने के लिए कमर्शियल वाहनों द्वारा नेशनल हाईवे का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही हजारों लोगों के जान माल की सुरक्षा की दृष्टि से सड़कों पर यातायात को और सुरक्षित व बेहतर बनाने की दिशा में भी उन्होंने कुछ सुझाव देते हुए उन पर अमल करने की प्रार्थना की है। पत्र में लिखा है कि अक्सर देखा गया है कि सिक्स लेन एक्सप्रेस-वे होने के नाते तीन-तीन लेन में ट्रक एक-दूसरे को ओवरटेक करते रहते हैं। इनमें से अधिकांश ट्रक ओवरलोडेड होते हैं।
इससे तीनों लेन घिर जाती हैं। वहीं प्राइवेट बसें भी मनमाने तरीके से किसी भी लेन पर चलती हैं। अक्सर ये बसें बाएँ हाथ पर स्लो लेन के बजाय बीच में या फास्ट लेन पर चलती हैं। राजा अरिदमन सिंह ने कहा कि एक्सप्रेस वे पर जगह-जगह साइनेज लगाकर वाहन चालकों को स्लो लेन, फास्ट लेन, कमर्शियल वाहनों की लेन आदि की जानकारी दी जाए।
फिर भी कोई वाहन चालक गलत लेन में वाहन चलाए तो उसका चालान किया जाए। यह पाया गया है कि स्लीपर कोच की बॉडी का निर्माण भी सामान्य ट्रक या बस की चेसिस से किया जाता है, जिसके कारण दुर्घटना की दशा में भारी वाहनों का कमजोर शरीर दुर्घटना की चपेट नहीं सह पाता और परिणाम स्वरूप जान माल की बड़ी हानि होती है। ऐसे में, निवेदन है कि बसों और ट्रकों सहित सभी भारी वाहनों का निर्माण सुरक्षा की दृष्टि से सही है या नहीं, इसकी जाँच करवाई जाए और फिर इस दिशा में मानक तय किए जाएं। आगे से इन सुरक्षा मानकों के आधार पर ही वाहनों का निर्माण कार्य सुनिश्चित किया जाए।
स्लीपर कोच हो या टू बाई टू वाली बस या अन्य कोई बड़ा वाहन… सभी में प्रवेश और निकासी के साथ-साथ इमरजैंसी एग्जिट की भी पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। राजा अरिदमन सिंह ने लिखा है कि लखनऊ और आगरा टोल से लगी सर्विस लेन पर कई ढाबे खुल गए हैं। उन्होंने एक्सप्रेस-वे से नीचे ढाबे तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बना दी हैं। ट्रक वाले एक्सप्रेस-वे पर ही ट्रक रोक देते हैं और नीचे जलपान के लिए चले जाते हैं। अक्सर भारी मात्रा में ट्रक वहाँ खड़े रहते हैं। इन पर भी अविलंब रोक लगाई जानी चाहिए। एक्सप्रेस वे पर प्राइवेट वाहन चलाने वाले लोग अक्सर तय रफ्तार की दर से अधिक रफ्तार पर वाहन चलाते हैं। अक्सर शराब भी पी लेते हैं। यह भी पता नहीं होता कि उनके पास लाइसेंस है या नहीं। ऐसे में एक्सप्रेस-वे पर चलने के लिए केवल यूपीएसआरटीसी की बसों को ही अनुमति प्रदान की जानी चाहिए। कोहरा बढ़ने पर ही दुर्घटनाएँ भी बढ़ जाती हैं। इसलिए निवेदन है कि सुरक्षा की दृष्टि से कोहरा होने पर नाइट सर्विस पूरी तरह बंद कर देनी चाहिए ताकि दुर्घटनाएँ न हों। आगरा-दिल्ली एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य ठीक न हो पाने के कारण अक्सर वहाँ टायर घिसकर फटने पर गाड़ियाँ दुर्घटनाग्रस्त होती रही हैं। सैकड़ों लोगों की मौत इन दुर्घटनाओं में हो चुकी है। निवेदन है कि जो दुर्घटनाएँ टायर फटने से हुई हैं, उन दुर्घटनाओं से ग्रसित परिवारों को सड़क निर्माण एजेंसीज द्वारा मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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