
यूनिक समय, नई दिल्ली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लखनऊ के लोकभवन सभागार में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में नवचयनित 2,425 मुख्य सेविकाओं और 13 फार्मासिस्टों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इस दौरान उन्होंने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में युवाओं की नियुक्ति जाति या धर्म देखकर नहीं, बल्कि पूरी शुचिता और पारदर्शिता के साथ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पिछले 20 वर्षों से प्रदेश में बंदरबांट होती थी, क्योंकि राज्य का नेतृत्व करने वालों की मानसिकता बीमार थी, लेकिन अब हालात बदल गए हैं।
थारू जनजाति की बेटी का उदाहरण
सीएम योगी ने कहा कि जब चयन प्रक्रिया निष्पक्ष होती है, तो आजमगढ़, शामली या किसी भी जिले की बेटियों का चयन होता है। उन्होंने थारू जनजाति की एक बेटी के चयन का जिक्र करते हुए कहा कि यह दिखाता है कि हमारी चयन प्रक्रिया कितनी शुचितापूर्ण है। मुख्यमंत्री ने नवचयनित अभ्यर्थियों से ईमानदारी और परिश्रम के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करने की अपील की।
विपक्ष पर निशाना और आंगनबाड़ी का महत्व
मुख्यमंत्री योगी ने इस मौके पर विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने 20 साल से यूपी को बीमारू राज्य बना दिया था वो अब भी नकारात्मक मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम जर्जर स्कूलों को ठीक कर रहे हैं और बाल वाटिकाएं शुरू कर रहे हैं, जिसका भी विपक्ष विरोध कर रहा है। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों के महत्व को बताते हुए मुख्य सेविकाओं की तुलना मां यशोदा से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह मां यशोदा ने बच्चों का पालन-पोषण किया, उसी तरह मुख्य सेविकाओं की जिम्मेदारी बच्चों की देखरेख करना है।
कन्याओं के उत्थान पर जोर
नियुक्ति पत्र वितरण समारोह कार्यक्रम में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि योगी सरकार कन्याओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि सरकार ने 4.77 लाख से अधिक कन्याओं का विवाह कराया है और ‘कन्या सुमंगला योजना’ के तहत 26 लाख से अधिक बालिकाओं को लाभ मिला है। महिला कल्याण मंत्री बेबी रानी मौर्य और राज्य मंत्री प्रतिभा शुक्ला ने भी इस ऐतिहासिक नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताया।
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