Maharashtra: अंबरनाथ और अकोट में विपक्षी दलों संग गठबंधन पर बिफरे सीएम फडणवीस, कार्रवाई की दी चेतावनी

गठबंधन पर बिफरे सीएम फडणवीस

यूनिक समय, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ और अकोट नगर परिषदों के भीतर बने अप्रत्याशित और ‘अजीब’ राजनीतिक समीकरणों ने राज्य स्तर पर खलबली मचा दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्थानीय स्तर पर भाजपा इकाइयों द्वारा कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के साथ किए गए गठबंधन को पूरी तरह खारिज करते हुए इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।

सीएम फडणवीस ने दो टूक लहजे में कहा है कि भाजपा किसी भी परिस्थिति में कांग्रेस या ओवैसी की पार्टी के साथ वैचारिक रूप से हाथ नहीं मिला सकती और इस तरह का कोई भी कदम पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की अनुमति के बिना उठाया गया है, जो सीधे तौर पर संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन है।

अंबरनाथ नगर परिषद में उपजे विवाद ने विशेष रूप से ध्यान खींचा है, जहाँ भाजपा ने महायुति में अपनी प्रमुख सहयोगी एकनाथ शिंदे की शिवसेना को दरकिनार कर कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ के बैनर तले हाथ मिला लिया। इस गठबंधन के कारण भाजपा पार्षद तेजश्री करंजुले पाटिल ने शिवसेना की उम्मीदवार को हराकर अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया।

60 सदस्यीय इस परिषद में बहुमत के लिए 30 सीटों की आवश्यकता थी, जहाँ भाजपा ने कांग्रेस के 12 और एनसीपी के 4 पार्षदों के समर्थन से 32 का आंकड़ा छू लिया। इस अनैतिक गठबंधन के चलते कांग्रेस ने भी कड़ा कदम उठाते हुए अपने 12 निर्वाचित पार्षदों और ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप पाटिल को पार्टी से निलंबित कर दिया है।

वहीं दूसरी ओर अकोला के अकोट में भाजपा ने ‘अकोट विकास मंच’ का गठन किया, जिसमें ओवैसी की पार्टी AIMIM के साथ-साथ उद्धव ठाकरे की शिवसेना और शरद पवार की एनसीपी जैसे विरोधी दलों के पार्षदों को भी शामिल किया गया। इस विचित्र गठबंधन के जरिए भाजपा की माया धुले महापौर तो चुनी गईं, लेकिन इसने पार्टी की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

सीएम फडणवीस ने इन सभी घटनाक्रमों को ‘संगठन विरोधी’ करार देते हुए निर्देश दिए हैं कि इन गठबंधनों को तुरंत रद्द किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि व्यक्तिगत सत्ता के लालच में पार्टी की विचारधारा को ताक पर रखने वाले स्थानीय नेताओं के खिलाफ जल्द ही सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में कोई भी कार्यकर्ता इस तरह के अनुशासनहीनता का साहस न कर सके।

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