
यूनिक समय, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। एनसीपी के प्रमुख शरद पवार ने अजित पवार के निधन के बाद दोनों NCP के विलय और सुनेत्रा पवार के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ को लेकर बड़ा बयान दिया है। शरद पवार ने स्पष्ट किया है कि विलय की जो चर्चा सकारात्मक दिशा में चल रही थी, वह अब रुक गई है।
शरद पवार का बड़ा बयान
शरद पवार ने बारामती में पत्रकारों से बात करते हुए खुलासा किया कि दोनों एनसीपी गुटों को एक साथ लाने के लिए पिछले चार महीनों से जयंत पाटिल और अजित पवार के बीच बातचीत चल रही थी। उन्होंने कहा “आज सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ लेने के बारे में कोई जानकारी नहीं है; यह फैसला उनकी पार्टी ने ही लिया होगा। पिछले चार महीनों से जयंत पाटिल और अजीत पवार के बीच NCP के दोनों गुटों के विलय को लेकर बातचीत चल रही थी। बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही थी, और महीने की 12 तारीख को एक सार्वजनिक घोषणा की योजना भी बनाई गई थी।” शरद पवार ने अजित पवार को एक सक्षम और प्रतिबद्ध नेता बताया, जो जनसमस्याओं को गहराई से समझते थे। उन्होंने कहा कि अजित पवार के निधन ने सभी को गहरे सदमे में डाल दिया है और अब विलय की चर्चा में रुकावट पैदा हो सकती है।
सुनेत्रा पवार के शपथ ग्रहण पर शरद पवार की बेबाकी
सुनेत्रा पवार के महाराष्ट्र की नई डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ लेने की खबरों पर शरद पवार ने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया “सुनेत्रा अस्थि विसर्जन तक हमारे साथ थीं, लेकिन उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद को लेकर कोई बात नहीं की। उनके शपथ लेने का निर्णय उनकी पार्टी (अजित गुट) का होगा, जिसमें प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने पहल की होगी।” सूत्रों के अनुसार, सुनेत्रा पवार और उनके बेटे अस्थि विसर्जन के बाद शरद पवार को बिना बताए ही रात में बारामती से निकल गए, जिससे पवार परिवार में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
पवार परिवार में भारी नाराजगी
राजनीतिक गलियारों और सूत्रों के हवाले से खबर है कि अजित पवार के अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन के तुरंत बाद सुनेत्रा पवार का विधायक दल का नेता बनना और डिप्टी सीएम पद की शपथ लेना परिवार को रास नहीं आया है। परिवार के अन्य सदस्यों का मानना था कि राजनीति से पहले शोक के समय का सम्मान करते हुए कुछ दिन इंतजार करना चाहिए था। सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के साथ ही यह भी चर्चा तेज है कि अब वित्त विभाग बीजेपी के पास जा सकता है। बजट पेश करने से ठीक पहले हुए इस बदलाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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