
यूनिक समय, नई दिल्ली। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर को मान्यता देते हुए राज्य की फडणवीस सरकार ने सार्वजनिक गणेशोत्सव को ‘राज्य महोत्सव’ का दर्जा देने का निर्णय लिया है। यह घोषणा राज्य के सांस्कृतिक मामलों के मंत्री आशीष शेलार ने विधानसभा में की, जहां उन्होंने बताया कि यह निर्णय जल्द ही औपचारिक रूप से लागू किया जाएगा।
इस मांग को भारतीय जनता पार्टी के विधायक हेमंत रसाने ने विधानसभा सत्र के दौरान उठाया था, जिसे सरकार ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। मंत्री शेलार ने कहा कि गणेशोत्सव सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की सामाजिक एकता, सांस्कृतिक गौरव और राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।
गौरतलब है कि वर्ष 1893 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने सार्वजनिक गणेशोत्सव की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य लोगों को एकजुट करना और राष्ट्रीय चेतना को प्रोत्साहित करना था। तब से यह त्योहार न सिर्फ धार्मिक भावनाओं, बल्कि सामाजिक सहभागिता का भी एक बड़ा माध्यम बन चुका है।
शेलार ने यह भी बताया कि पूर्व में इस उत्सव को लेकर कई कानूनी अड़चनें सामने आई थीं, जिनमें उत्सव आयोजनों को अनुमति न देने जैसी याचिकाएं शामिल थीं। लेकिन मौजूदा सरकार ने ऐसी सभी बाधाओं को दूर कर, गणेशोत्सव को उसकी पूरी गरिमा के साथ मनाने का रास्ता साफ किया है।
सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि वह राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने और उसे आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गणेशोत्सव को राज्य महोत्सव का दर्जा देकर यह निर्णय महाराष्ट्र की सांस्कृतिक परंपराओं को नया सम्मान और पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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