
यूनिक समय, वृंदावन। उत्तर प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में अपनी ईमानदारी और कड़े फैसलों के लिए चर्चित रहे पूर्व अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने सोमवार को धर्मनगरी वृंदावन से अपनी नई राजनीतिक पारी का औपचारिक आगाज कर दिया। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण और यूजीसी के नियमों से जुड़े विवाद के बाद प्रशासनिक सेवा को तिलांजलि देने वाले अग्निहोत्री ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी “राष्ट्रीय अधिकार पार्टी” के गठन की घोषणा कर सबको चौंका दिया है।
प्रशासनिक कुर्सी से जन-अधिकारों के मैदान तक
अलंकार अग्निहोत्री ने अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम का अनावरण करते हुए यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी भविष्य की राजनीति का मुख्य केंद्र ‘आम नागरिक’ ही होगा।
उन्होंने अपनी नवगठित “राष्ट्रीय अधिकार पार्टी” के विजन को साझा करते हुए कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के संवैधानिक और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना, सरकारी प्रशासन में पारदर्शिता लाना और व्यवस्था के भीतर जवाबदेही तय करना है।
अपने अगले कदम के रूप में वे पार्टी के आधिकारिक पंजीकरण के लिए जल्द ही चुनाव आयोग से संपर्क करेंगे और आने वाले दिनों में संगठन के ढांचे के साथ-साथ अपनी नीतियों का विस्तृत खुलासा भी करेंगे।
कौन हैं अलंकार अग्निहोत्री
अलंकार अग्निहोत्री की जीवन यात्रा किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। मूल रूप से कानपुर के निवासी अलंकार ने बचपन में ही (10 वर्ष की आयु में) पिता को खो दिया था। अभावों के बीच उन्होंने IIT-BHU से बीटेक किया और आईटी सेक्टर की मोटी सैलरी वाली नौकरी छोड़कर यूपीपीसीएस (UPPCS) का रुख किया। अपने पहले ही प्रयास में 15वीं रैंक हासिल कर वे डिप्टी कलेक्टर (SDM) बने। 2019 बैच के इस अधिकारी ने लखनऊ, उन्नाव और बलरामपुर जैसे जिलों में अपनी सेवाएं दीं।
बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट पद पर तैनाती के दौरान स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और यूजीसी नियमों से जुड़े विवादों में अपने सिद्धांतों से समझौता न करते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
सियासी गलियारों में हलचल
अलंकार अग्निहोत्री के इस कदम ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। प्रशासनिक बारीकियों को समझने वाला एक युवा और शिक्षित चेहरा जब सीधे राजनीति के मैदान में उतरता है, तो स्थापित राजनीतिक दलों के समीकरण बिगड़ना तय माना जा रहा है। विशेष रूप से समाजवादी पार्टी के नेताओं से उनकी हालिया मुलाकातों ने भी इस चर्चा को हवा दी थी, लेकिन अपनी खुद की पार्टी बनाकर उन्होंने स्वतंत्र राजनीति का संकेत दिया है।
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