
यूनिक समय, मथुरा। धर्मनगरी मथुरा और वृंदावन में पिछले कुछ वर्षों के भीतर श्रद्धालुओं की संख्या में हुए अप्रत्याशित इजाफे ने जहाँ एक ओर ब्रज की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी है, वहीं दूसरी ओर दर्शन के समय और भीड़ प्रबंधन को लेकर नई चुनौतियाँ भी खड़ी कर दी हैं। आंकड़ों की मानें तो पिछले चार-पांच वर्षों में ब्रजमंडल के प्रमुख मंदिरों में दर्शनार्थियों की संख्या करीब दस गुना बढ़ गई है।
बांके बिहारी और द्वारकाधीश जैसे विश्व प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन के लिए देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालु अक्सर समय की सटीक जानकारी न होने के कारण निराश होकर लौट जाते हैं। विशेष रूप से द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन का समय बांके बिहारी मंदिर से भिन्न होने के कारण कई श्रद्धालु जब तक यहाँ पहुँचते हैं, तब तक मंदिर के पट बंद हो चुके होते हैं।
इसी गंभीर समस्या और स्थानीय व्यापार पर इसके प्रभाव को देखते हुए उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के एक प्रतिनिधिमंडल ने कांकरोली नरेश 108 डॉ. बागीश कुमार महाराज से मुलाकात की। व्यापारियों ने इस दौरान उन्हें षष्ठीपूर्ति उत्सव की बधाई देने के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी सौंपा।
महानगर अध्यक्ष अजय चतुर्वेदी ने इस बात पर जोर दिया कि द्वारकाधीश मंदिर क्षेत्र केवल आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि मथुरा के व्यापार का मुख्य आधार स्तंभ भी है। मंदिर के आसपास लगभग 200 व्यापारिक प्रतिष्ठान संचालित हैं जिनसे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई है। वर्तमान समय सारिणी के अनुसार शाम 7:30 बजे मंदिर बंद होते ही पूरे बाजार में सन्नाटा पसर जाता है, जिसका सीधा असर छोटे और बड़े व्यापारियों के व्यापार पर पड़ता है।
प्रतिनिधिमंडल ने मंदिर प्रबंधन से विनम्र निवेदन किया है कि श्रद्धालुओं की सुगमता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मंदिर के पट खुलने का समय रात 8:30 बजे तक बढ़ाया जाए। व्यापारियों का मानना है कि यदि दर्शन का समय एक घंटा बढ़ा दिया जाता है, तो दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को दर्शन के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा और शाम के समय बाजारों में रौनक बनी रहेगी।
इस चर्चा के दौरान व्यापारियों ने मंदिर परिसर में झांकियों के समय होने वाली भारी भीड़ और उससे उत्पन्न होने वाली असुविधाओं का भी उल्लेख किया। इस मुलाकात के दौरान जिला महामंत्री अंशुल अग्रवाल और राजेश गोयल सहित संगठन के दर्जनों पदाधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से मंदिर प्रबंधन से इस प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आग्रह किया है ताकि ब्रज आने वाला कोई भी श्रद्धालु बिना दर्शन किए वापस न जाए।
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