
यूनिक समय, मथुरा। बिजली कनेक्शन लेना अब पहले से कहीं महंगा हो गया है। पावर कॉर्पोरेशन ने नए कनेक्शनों पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसकी वजह से उपभोक्ताओं को पांच से दस हजार रुपये तक अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा। अभी तक पुराना मीटर मात्र 800 रुपये में लग जाता था, लेकिन अब स्मार्ट मीटर की कीमत छह से ग्यारह हजार रुपये तक पहुंच गई है।
वर्ष 2019 कास्ट डाटा बुक के अनुसार, पुराने मीटर की कीमत सिंगल फेज के लिए 872 रुपये और थ्री फेज के लिए 2921 रुपये थी। वहीं स्मार्ट प्रीपेड मीटर में सिंगल फेज की कीमत 6016 रुपये और थ्री फेज की कीमत 11,341 रुपये तय की गई है। हालांकि, कॉर्पोरेशन ने अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया है कि उपभोक्ताओं से यह राशि कैसे वसूली जाएगी।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि आरडीएसएस योजना के तहत खरीदे गए मीटरों का खर्च आम जनता से नहीं लिया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पावर कॉर्पोरेशन को इस विषय में स्पष्ट गाइडलाइन जारी करनी चाहिए। फिलहाल प्रदेश में करीब 37 लाख स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके हैं। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने सभी विद्युत वितरण निगमों को निर्देश दिया है कि अब से नए कनेक्शन केवल स्मार्ट प्रीपेड मीटर के साथ ही दिए जाएं। साथ ही खराब मीटर बदलने या भार बढ़ाने की स्थिति में भी स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य होगा।
कृषि उपभोक्ताओं को फिलहाल इस दायरे से बाहर रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत पर पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन फिलहाल इसकी ऊंची लागत उपभोक्ताओं के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
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