
यूनिक समय, मथुरा। वृंदावन स्थित प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर से जुड़े अधिग्रहण और कॉरिडोर निर्माण से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को प्रस्तावित सुनवाई फिलहाल स्थगित कर दी गई है। अब इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश की बेंच करेगी, जो सभी संबंधित याचिकाओं पर आगे की तिथि निर्धारित करेगी।
इससे पूर्व यह मामला सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच—जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र की पीठ—के समक्ष था। याचिका में मंदिर से जुड़े धन के प्रयोग और कॉरिडोर निर्माण के फैसले को चुनौती दी गई थी। मंदिर के सेवायत देवेंद्र गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश के खिलाफ 27 मई को पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी, जिस पर 29 जुलाई को सुनवाई होनी थी, लेकिन अब इसे एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एपी सिंह के अनुसार, ब्रज क्षेत्र के 107 लोगों की ओर से याचिका दाखिल की गई है। उनका कहना है कि कॉरिडोर परियोजना के चलते सैकड़ों परिवारों के घर तोड़े जा रहे हैं, जो संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन है। इन अनुच्छेदों के तहत नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता और धार्मिक संस्थाओं को स्वशासन का अधिकार प्राप्त है।
याचिकाकर्ता राकेश अग्रवाल ने कहा कि इतिहास में मुगल शासन के समय मंदिर की गरिमा इन्हीं गलियों के कारण सुरक्षित रही थी। वहीं नारायणी सेना के उपाध्यक्ष मनीष भारद्वाज ने इन्हें ब्रजधाम की आत्मा बताया। स्थानीय नागरिक सोहनलाल शर्मा ने भी कहा कि यह गलियां स्वयं कृष्णलीला की साक्षी रही हैं।
अब सभी याचिकाएं मुख्य न्यायाधीश की बेंच के पास भेज दी गई हैं और उसी के निर्देश पर अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
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