
यूनिक समय, गोवर्धन। मानसी गंगा में जल प्रदूषण का स्तर इतना अधिक बढ़ चुका है कि मानसी गंगा का जल अब आचमन योग्य भी नहीं रह गया है। गिरिराज महाराज की परिक्रमा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी गंगा का निर्मल जल स्नान और आचमन करने के लिए विशेष महत्व रखता है । लेकिन जब आचमन करने वाला जल जहरीला हो जाए तो भला श्रद्धालु कैसे आचमन करें इसलिए श्रद्धालु भी प्रशासन को कोसते हुए वापस लौट जाते हैं।
गंगा का जल इतना जहरीला हो चुका है कि प्रतिदिन सैकड़ो की तादाद में मछलियों की मौत हो रही है। लेकिन चुनाव के समय पर गंगा को स्वच्छ बनाने के दावे करके वोट मांगने वाले जिम्मेदार अब उसकी कोई सुध नहीं ले रहे हैं। और ना ही ई ओ गोवर्धन और अन्य अधिकारियों को इसकी परवाह है।
तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के द्वारा समय-समय पर सोशल मीडिया के माध्यम से जिम्मेदार पदाधिकारियों को इसके विषय में अवगत भी कराया जा चुका है लेकिन आज तक मानसी गंगा की स्वच्छता का कोई भी हल नहीं निकल पाया है।
मानसी गंगा का जल इतना जहरीला और दूषित हो चुका है कि उसका रंग भी काला पड़ गया है तस्वीरों में आप देख सकते हैं कि किस प्रकार गंगा का निर्मल जल आज प्रदूषण होकर काला पानी बन चुका है जिसमें सैकड़ो की संख्या में मछलियां तड़प तड़प कर प्रतिदिन अपनी जान दे रही है देखना होगा कि मामले की गंभीरता को समझते हुए उप जिला अधिकारी ई ओ और नगर पंचायत प्रशासन कब इसकी सुध लेंगे और जरूरी कदम उठाते हुए मानसी गंगा की स्वच्छता पर ध्यान केंद्रित करेंगे। अन्यथा ऐसे ही जहरीले पानी में मछलियां तड़पती रहेगी और आने वाले श्रद्धालु बिना आचमन किया ही प्रशासन को कोसते हुए लौटते रहेंगे।
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