
यूनिक समय, मथुरा। ब्रज की विश्व प्रसिद्ध होली का शंखनाद मंगलवार को बरसाना की लाडली जी (श्रीजी) मंदिर में ‘लड्डू मार होली’ के साथ हुआ। फाल्गुन मास की इस पारंपरिक और अनूठी होली के गवाह बनने के लिए देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु राधारानी की पावन नगरी में उमड़ पड़े। पूरे मंदिर परिसर में जब पुजारियों ने भक्तों पर प्रसाद स्वरूप लड्डुओं की बौछार की, तो समूचा वातावरण ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा और श्रद्धा व उल्लास का अद्भुत नजारा देखने को मिला।
लड्डू होली की धार्मिक मान्यता
ब्रज की परंपरा के अनुसार, द्वापर युग में जब नंदगांव से सखा होली खेलने का निमंत्रण स्वीकार होने की सूचना लेकर बरसाना आए थे, तब बरसाना के गोस्वामी समाज ने हर्षोल्लास में उन पर लड्डुओं की वर्षा की थी। उसी पौराणिक प्रसंग की याद में आज भी यह उत्सव मनाया जाता है।
श्रीजी मंदिर परिसर में गोस्वामी समाज के सदस्यों ने पारंपरिक पदों का गायन करते हुए जैसे ही लड्डुओं की बारिश शुरू की, भक्तों में उन्हें प्रसाद के रूप में पाने की होड़ मच गई।
यह उत्सव केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि प्रेम और भक्ति का वह संगम है जहाँ भगवान और भक्त के बीच का अंतर मिट जाता है। मंदिर में अबीर-गुलाल के साथ लड्डुओं की मिठास ने हर किसी को भाव-विभोर कर दिया।
ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी
लाखों की भीड़ को देखते हुए मथुरा जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए थे। भीड़ नियंत्रण के लिए पूरे मेला क्षेत्र को कई जोन और सेक्टरों में बांटा गया था। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा बल तैनात रहे ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से दर्शन कर सकें। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यातायात प्रबंधन, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया था। उच्च अधिकारियों ने स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
देश-विदेश से आये श्रद्धालु
बरसाना की होली अब केवल स्थानीय उत्सव नहीं, बल्कि एक वैश्विक पर्यटन आकर्षण बन चुकी है। इस वर्ष न केवल देश के कोने-कोने से बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक इस अनूठे सांस्कृतिक उत्सव का हिस्सा बनने पहुँचे। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे भक्त भक्ति संगीत की धुनों पर थिरकते हुए ब्रज की इस प्राचीन संस्कृति के कायल नजर आए।
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