
यूनिक समय, नई दिल्ली। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग आज छठे दिन और भी भीषण हो गई है। ईरान पर अमेरिकी हवाई हमलों के 100 घंटे पूरे हो चुके हैं, जिसमें अब तक 1,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इजराइल और अमेरिका ने मिलकर अब तक ईरान के 17 जहाजों को समुद्र में समाधि दे दी है। बीती रात इजरायली वायुसेना ने तेहरान में घुसकर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के मुख्यालय को मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया।
तेहरान पर ‘कयामत’ बनकर बरसे 250 बम
मंगलवार रात इजरायली वायुसेना ने अब तक का सबसे बड़ा हवाई हमला करते हुए पूर्वी तेहरान को अपना मुख्य निशाना बनाया, जिसमें 100 से अधिक लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरकर ईरानी ठिकानों पर 250 से ज्यादा बम बरसाए। इस हमले के परिणामस्वरूप ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) का मुख्यालय, इंटेलिजेंस विंग, आंतरिक सुरक्षा बल और साइबर वॉर यूनिट के रणनीतिक केंद्र पूरी तरह नष्ट होने का दावा किया गया है।
इजराइल के सैन्य प्रवक्ता के अनुसार, इस व्यापक ऑपरेशन के दौरान ईरान के लगभग 300 डिफेंस सिस्टम और बैलिस्टिक मिसाइलों को सफलतापूर्वक ध्वस्त कर दिया गया है, जिससे ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को गंभीर चोट पहुँची है।
भारतीय तट से लौटा युद्धपोत डूबा
मिडिल ईस्ट में जारी भीषण जंग की आग अब सीमाओं को लांघकर हिंद महासागर तक फैल गई है, जहाँ श्रीलंका के गाले तट से लगभग 75 किलोमीटर दूर एक बड़ा सैन्य टकराव देखने को मिला है। भारत के विशाखापट्टनम में आयोजित ‘इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू 2026’ में हिस्सा लेकर वापस लौट रहे ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ को अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से निशाना बनाकर समुद्र में डुबा दिया।
इस विनाशकारी हमले में अब तक 87 ईरानी नौसैनिकों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि श्रीलंकाई नौसेना ने तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर 32 घायल सैनिकों को सुरक्षित बचा लिया है। वर्तमान में लापता नौसैनिकों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन जारी है, जिसने इस क्षेत्रीय संघर्ष को एक गंभीर अंतरराष्ट्रीय संकट में बदल दिया है।
ईरान का पलटवार
ईरान ने अपनी चौतरफा घेराबंदी का कड़ा जवाब देते हुए मध्य पूर्व के 9 अलग-अलग देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इसके साथ ही, ईरानी सैन्य अधिकारियों ने इजराइल को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि अमेरिका और इजराइल ने ईरान में सत्ता परिवर्तन की कोई भी कोशिश की, तो वे दक्षिणी इजराइल में स्थित डिमोना (Dimona) न्यूक्लियर सेंटर को निशाना बनाने से नहीं हिचकिचाएंगे, जिससे परमाणु तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।
दूसरी ओर, इजराइली सेना ने केवल ईरान तक ही सीमित न रहकर लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर भी अपने हमले तेज कर दिए हैं। इसी क्रम में उत्तरी लेबनान के सबसे बड़े फिलिस्तीनी शरणार्थी कैंप ‘बेद्दावी’ (Beddawi) पर किए गए इजराइली हवाई हमले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि युद्ध की यह आग अब नागरिक आबादी वाले क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले रही है।
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