Middle East War: ईरान के पलटवार से ट्रंप प्रशासन पर भड़के खाड़ी देश, कहा- “अमेरिका ने हमें अकेला छोड़ा”

Iran's counterattack angers Gulf countries at Trump administration

यूनिक समय, नई दिल्ली।  मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का जवाब देने के लिए अब उनके क्षेत्रीय सहयोगियों (खाड़ी देशों) को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, फारस की खाड़ी के देश डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से बेहद नाराज हैं। उनका आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने अपने हमलों की जानकारी उनसे साझा नहीं की, जिसका खामियाजा अब उन्हें ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।

खाड़ी देशों की नाराजगी: “अमेरिका ने हमें अकेला छोड़ा”

समाचार एजेंसी एपी के अनुसार सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन जैसे खाड़ी देश के अधिकारी अमेरिका के युद्ध प्रबंधन के तरीके से बेहद खफा नजर आ रहे हैं क्योंकि उनका मानना है कि अमेरिका ने उन्हें इस संकट में अकेला छोड़ दिया है।

खाड़ी देशों का मुख्य आरोप यह है कि उन्हें इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए शुरुआती हमलों की कोई पूर्व जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके कारण उन्हें ईरानी जवाबी कार्रवाई से निपटने और तैयारी करने का आवश्यक समय नहीं मिल पाया। इसके साथ ही इन देशों के अधिकारियों ने अमेरिका पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना का पूरा ध्यान केवल अपने और इजरायली सैनिकों के बचाव पर केंद्रित रहा, जबकि खाड़ी के देशों को ईरान की मिसाइलों के लिए एक ‘आसान टारगेट’ के रूप में उनके हाल पर छोड़ दिया गया है।

स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि इन देशों का दावा है कि उनके इंटरसेप्टर यानी मिसाइल डिफेंस सिस्टम का स्टॉक अब तेजी से खत्म हो रहा है, जिससे उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा और तेल क्षेत्रों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

ईरानी हमलों से भारी तबाही

ईरानी हमलों के बाद खाड़ी देश में जो तबाही का मंजर दिख रहा है, उसके आंकड़े बेहद डराने वाले हैं क्योंकि पिछले शनिवार से शुरू हुई इस जंग में ईरान ने खाड़ी के पांच देशों पर जबरदस्त कहर बरपाया है। आधिकारिक रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अब तक लगभग 380 मिसाइलें और 1,480 से ज्यादा ड्रोन दागे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था चरमरा गई है। इन हमलों में अब तक कम से कम 13 लोगों की जान जाने की पुष्टि हुई है, जिसमें सबसे बड़ा और घातक नुकसान कुवैत में देखने को मिला, जहाँ एक सिविलियन पोर्ट पर हुए ईरानी ड्रोन हमले की चपेट में आने से 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई।

ईरान का मुख्य निशाना इन देशों के ‘ऑयल हब’ और एनर्जी फैसिलिटीज हैं, जहाँ उसकी कम दूरी की मिसाइलें लगातार तबाही मचा रही हैं, जिससे न केवल टूरिस्ट स्पॉट और बिजनेस सेंटर्स प्रभावित हुए हैं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति (Oil Flow) के पूरी तरह रुकने का गंभीर खतरा भी पैदा हो गया है।

सऊदी अरब का कड़ा रुख

सऊदी अरब के पूर्व इंटेलिजेंस चीफ, प्रिंस तुर्की अल-फैसल ने साफ तौर पर कहा है कि यह इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की निजी जंग है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को बेवजह घसीट लिया है। खाड़ी के विशेषज्ञों का मानना है कि इस अस्थिरता का सबसे ज्यादा आर्थिक और सामरिक नुकसान अरब देशों को ही उठाना पड़ेगा।

व्हाइट हाउस का बचाव

तनाव के बीच व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने दावा किया है कि अमेरिका के ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की वजह से ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों की मारक क्षमता 90 फीसदी तक कम हो गई है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप लगातार सहयोगियों के संपर्क में हैं और ईरान का खतरा खत्म करना क्षेत्र की शांति के लिए अनिवार्य है। हालांकि, पेंटागन के अधिकारियों ने स्वीकार किया है कि ईरान के छोटे ड्रोन हमलों को रोकना फिलहाल एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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