New Labour Codes: भारत में चार श्रम संहिताएं लागू, सैलरी स्ट्रक्चर में हुआ बड़ा बदलाव

भारत में चार श्रम संहिताएं लागू

यूनिक समय, नई दिल्ली। भारत सरकार ने देश के श्रमिकों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए शुक्रवार, 21 नवंबर 2025 से चार श्रम संहिताओं (Labour Codes) को लागू करने की घोषणा की है। इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य 29 मौजूदा श्रम कानूनों को सरल बनाना, श्रमिकों को बेहतर वेतन, सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करना है, साथ ही औपनिवेशिक काल की पुरानी व्यवस्थाओं से हटकर आधुनिक वैश्विक प्रवृत्तियों के अनुरूप आना है।

लागू होने वाली प्रमुख चार श्रम संहिताएं

1. वेज कोड

न्यूनतम वेतन अधिकार: देश के हर कर्मचारी (संगठित या असंगठित क्षेत्र) को न्यूनतम वेतन पाने का अधिकार मिलेगा।

फ्लोर वेज: सरकार एक राष्ट्रीय फ्लोर वेज (आधार वेतन) तय करेगी, जिससे नीचे कोई भी राज्य न्यूनतम वेतन नहीं रख सकेगा।

ओवरटाइम भुगतान: ओवरटाइम करने पर कंपनियों को डबल पे देना अनिवार्य होगा।

भेदभाव निषेध: महिला और ट्रांसजेंडर कर्मचारियों के साथ भर्ती या सैलरी में किसी भी तरह का भेदभाव पूरी तरह वर्जित होगा।

2. इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड

ग्रेच्युटी का अधिकार: फिक्स्ड टर्म कर्मचारी अब सिर्फ 1 साल में ग्रेच्युटी के हकदार होंगे।

हड़ताल नियम: अचानक हड़तालों को रोकने के लिए, स्ट्राइक (हड़ताल) के लिए 14 दिन का नोटिस देना अनिवार्य होगा।

वर्क-फ्रॉम-होम: सर्विस सेक्टर में वर्क-फ्रॉम-होम को कानूनी मान्यता दे दी गई है।

छंटनी की सीमा: छंटनी (retrenchment) और संस्थान को बंद करने के लिए कर्मचारियों की सीमा को 300 कर्मचारियों तक रखा गया है।

शिकायत समितियां: महिलाओं को शिकायत समितियों में समान भागीदारी मिलेगी।

3. सोशल सिक्योरिटी कोड

सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: गिग वर्कर, प्लेटफॉर्म वर्कर और असंगठित क्षेत्र के करोड़ों लोगों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।

ESIC का कवरेज: कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) की सुविधा अब पहले की तरह केवल नोटिफाइड एरिया तक सीमित न रहकर पूरे देश में लागू होगी।

दुर्घटना परिभाषा: घर से ऑफिस आते-जाते समय होने वाली दुर्घटना को भी अब ऑफिस से जुड़ा हादसा माना जाएगा।

EPF जांच: EPF से जुड़े मामलों में जांच की समय सीमा तय कर दी गई है।

ग्रेच्युटी: तय अवधि के कर्मचारियों को भी सिर्फ 1 साल काम करने पर ग्रेच्युटी मिलने का अधिकार होगा।

4. सेफ्टी और वर्किंग कंडीशंस कोड

नियमित स्वास्थ्य जांच: हर कर्मचारी का साल में एक बार फ्री हेल्थ चेकअप कराना अनिवार्य होगा।

कार्य के घंटे: रोज़ाना 8 घंटे और हफ्ते में 48 घंटे काम का नियम तय किया गया है।

नाइट शिफ्ट: महिलाएं भी नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी, बशर्ते उन्हें जरूरी सुरक्षा इंतज़ाम दिए जाएं।

माइग्रेंट वर्कर्स: अलग-अलग राज्यों में काम करने वाले माइग्रेंट वर्कर्स के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाया जाएगा, ताकि उन्हें आसानी से सरकारी सुविधाएं मिल सकें।

सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव

बेसिक सैलरी की सीमा: ‘कोड ऑन वेजेज’ के तहत, अब कर्मचारियों की कुल सैलरी (CTC) का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी (मूल वेतन) होगा।

पीएफ और ग्रेच्युटी: चूंकि पीएफ और ग्रेच्युटी की गणना बेसिक सैलरी के आधार पर होती है, इसलिए इन दोनों रिटायरमेंट फंडों में कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा।

टेक-होम सैलरी पर असर: पीएफ और ग्रेच्युटी में हिस्सा बढ़ने के कारण, कर्मचारियों की हाथ में आने वाली सैलरी (Take-Home Salary) थोड़ी कम हो सकती है, हालांकि यह कदम उनकी भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को मजबूत करेगा।

यह नियम इसलिए लाया गया है ताकि कंपनियां जानबूझकर बेसिक सैलरी कम रखकर और अलाउंस (भत्ते) बढ़ाकर पीएफ और ग्रेच्युटी में अपना योगदान कम न कर सकें। कंपनियों को अगले 45 दिनों में जारी होने वाले नियमों के हिसाब से अपनी सैलरी स्ट्रक्चर को बदलना होगा।

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