
यूनिक समय, नई दिल्ली। सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। इस नए फुटेज ने बचाव कार्य (Rescue Operation) की तत्परता और रणनीति पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। वीडियो में साफ दिख रहा है कि युवराज घने जंगल और अंधेरे के बीच अकेले फंसे हुए थे और आखिरी समय तक अपनी जान बचाने के लिए मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर बचाव दल को अपनी लोकेशन का संकेत दे रहे थे।
मोबाइल फ्लैश से मांगते रहे ‘जिंदगी’, सीढ़ी पर बैठी रही टीम
सामने आए वीडियो में युवराज दूर एक झाड़ीनुमा इलाके में फंसे नजर आ रहे हैं। वह लगातार अपने फोन की लाइट को हवा में घुमा रहे थे ताकि दूर मौजूद टीम उन्हें देख सके। वीडियो का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा वह है, जिसमें बचाव दल (Rescue Team) के कर्मचारी पास ही एक सीढ़ी पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। ऐसा लग रहा है कि टीम युवराज की सटीक दिशा को लेकर भारी असमंजस (Confusion) में थी। युवराज की लाइट साफ चमक रही थी, लेकिन टीम वहां पहुंचने के बजाय मौके पर ही रणनीति बनाने में समय गंवाती रही।
‘सटीक लोकेशन’ का संकट
युवराज एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और अपनी सूझबूझ से उन्होंने आखिरी समय तक रेस्क्यू टीम की मदद करने की कोशिश की। हालांकि, घटनास्थल पर गहरी खाई, ऊंची-नीची जमीन और कंटीली झाड़ियाँ थीं, जो राहत कार्य में बाधा बन रही थीं। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब युवराज की लाइट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी, तो टीम को वहां तक पहुंचने के लिए रास्ता खोजने में इतनी देर क्यों लगी?
रेस्क्यू ऑपरेशन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस नए फुटेज के वायरल होने के बाद सोशल मीडिया और पीड़ित परिवार के बीच भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि अगर खोजबीन की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और आधुनिक उपकरणों के साथ की जाती, तो युवराज को शायद समय रहते सुरक्षित निकाला जा सकता था।
प्रशासन ने शुरू की जांच
नए वीडियो के साक्ष्य के रूप में आने के बाद पुलिस और जिला प्रशासन ने पूरे मामले की फिर से जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू टीम के सदस्यों के बयानों का वीडियो फुटेज से मिलान किया जाएगा और यदि कोई कोताही पाई जाती है, तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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