
यूनिक समय, नई दिल्ली। अगर आप रोज ओला (OLA), उबर (UBER) या अन्य कैब एग्रीगेटर (Cab Aggregator) ऐप्स के जरिए यात्रा करते हैं, तो अब Peak Hours में आपको ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है। भारत सरकार के Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) ने Motor Vehicle Aggregator Guidelines 2025 के तहत कैब कंपनियों को बेस फेयर का दो गुना तक चार्ज करने की इजाज़त दे दी है। पहले यह सीमा सिर्फ 1.5 गुना थी।
क्या होते हैं पीक आवर्स?
पीक आवर्स वह समय होता है जब सड़कों पर ट्रैफिक ज्यादा होता है, तब कैब की मांग बढ़ती है या मौसम खराब होने की वजह से लोग ज्यादा कैब बुक करते हैं। आमतौर पर यह सुबह 8-11 बजे और शाम 5-9 बजे के बीच का समय होता है।
क्या बदलेगा आपके लिए?
- Peak Hours Cab Fare India: अब कैब एग्रीगेटर पीक समय में Base Fare का 2x तक शुल्क ले सकते हैं।
- Non-Peak Hours Fare Rule: नॉन-पीक समय में किराया बेस फेयर का कम से कम 50% होगा।
- राज्यों को यह गाइडलाइंस 3 महीनों के भीतर लागू करने की सलाह दी गई है।
डेड माइलेज पर मिनिमम किराया जरूरी
नई गाइडलाइंस के अनुसार, एग्रीगेटर कंपनियां Dead Mileage Compensation के तहत कम से कम 3 किमी का Base Fare चार्ज कर सकेंगी। इसमें ड्राइवर द्वारा बिना यात्री के तय की गई दूरी शामिल होगी।
OLA-UBER कैंसिलेशन पर लगेगा चार्ज
अगर कैब ड्राइवर या यात्री बिना वैध कारण के बुकिंग कैंसल करता है, तो ड्राइवर पर कुल किराए का 10% जुर्माना (अधिकतम ₹100) और यात्री पर भी समान जुर्माना लागू होगा।
License और Registration के नए नियम
सरकार एक Single Window Digital Portal for Aggregator License लॉन्च करेगी, जिससे ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे।
Cab Aggregator License Fees India: ₹5 लाख
वैधता: 5 साल
इस नए फैसले से जहां यात्रियों को पीक समय में अधिक किराया देना पड़ेगा, वहीं ड्राइवरों को भी उनकी सेवाओं के लिए उचित मुआवज़ा मिलेगा। सरकार का यह कदम ट्रांसपोर्ट सिस्टम को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें:- Nothing Headphone 1 भारत में हुआ लॉन्च, कीमत जानकर उड़ जायेंगे होश
Leave a Reply