
यूनिक समय, नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 55वें जन्मदिन के मौके पर पार्टी ने एक रणनीतिक कदम उठाते हुए दिल्ली में एक बड़े रोजगार मेले का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ केंद्र की मोदी सरकार को बेरोजगारी के मुद्दे पर घेरना भी है। कांग्रेस का मानना है कि यह पहल एक तीर से दो निशाने साधने जैसा है—एक ओर युवा वर्ग से सीधा संवाद और दूसरी ओर सरकार की नीतियों पर सवाल।
राहुल गांधी का जन्म 19 जून 1970 को नई दिल्ली के होली फैमिली हॉस्पिटल में हुआ था। इस वर्ष उन्होंने अपना 55वां जन्मदिन ऐसे समय में मनाया, जब कांग्रेस कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है। एक के बाद एक राज्यों से सत्ता का बाहर जाना और जनाधार में गिरावट पार्टी के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित इस रोजगार मेले में 100 से अधिक प्रमुख निजी कंपनियों ने हिस्सा लिया, जिनमें एयरटेल, ब्लिंकिट, टाटा, एचडीएफसी बैंक, फ्लिपकार्ट, महिंद्रा, एक्सिस बैंक, जेप्टो और कई आईटी व कंसल्टेंसी कंपनियां शामिल हैं। इस मेले में करीब 5,000 नौकरियों की पेशकश की गई, जिसमें युवाओं की योग्यताओं के अनुसार चयन किया गया।
दिल्ली यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष अक्षय लाकड़ा ने इसे दिल्ली-एनसीआर का सबसे बड़ा रोजगार मेला बताया, जबकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने जानकारी दी कि इस आयोजन के लिए 20,000 से अधिक युवाओं ने पहले ही पंजीकरण करा लिया था। मेला सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चला और इसे लेकर कांग्रेस ने व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार भी किया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस की यह पहल जहां एक ओर युवाओं को पार्टी से जोड़ने की कवायद है, वहीं यह मोदी सरकार की रोजगार नीति पर निशाना साधने की भी एक सोची-समझी रणनीति है।
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