
यूनिक समय, नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने देश की बदहाल आर्थिक स्थिति और विदेशी कर्ज पर अपनी निर्भरता को लेकर अब तक का सबसे बड़ा और दर्दनाक सच स्वीकार किया है। इस्लामाबाद में टॉप एक्सपोर्टर्स को संबोधित करते हुए उन्होंने माना कि पाकिस्तान को अस्तित्व बचाए रखने के लिए दोस्त देशों के सामने हाथ फैलाने पड़े।
“झुके सिर के साथ मांगनी पड़ी मदद”
शहबाज शरीफ ने बेहद भावुक अंदाज में देश की वित्तीय स्थिति का कच्चा चिट्ठा खोला। उन्होंने स्वीकार किया कि आईएमएफ (IMF) कार्यक्रम को बचाने और विदेशी मुद्रा के अंतर को भरने के लिए उन्हें और आर्मी चीफ आसिम मुनीर को ‘दोस्त देशों’ के दर पर बार-बार दस्तक देनी पड़ी। प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं आपको बता नहीं सकता कि किन-किन मुल्कों के सामने हमें हाथ फैलाने पड़े। मदद तो मिली, लेकिन कर्ज मांगने वाले का सिर हमेशा झुका रहता है।” उन्होंने माना कि कर्ज के बदले कई बार ऐसी ‘नामुमकिन’ शर्तें माननी पड़ती हैं, जो देश की प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान (इज्जत-ए-नफ्स) को चोट पहुँचाती हैं।
कर्ज के दलदल में धंसा पाकिस्तान
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति इतनी नाजुक है कि वह पुराने कर्ज की किश्तें चुकाने के लिए भी नया कर्ज ले रहा है। दिसंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, पाकिस्तान पर कुल विदेशी कर्ज का बोझ 52.366 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच चुका है।पाकिस्तान मुख्य रूप से चीन, सऊदी अरब, आईएमएफ और विश्व बैंक के ऋण पर टिका हुआ है। शहबाज ने कहा कि अब दोस्त मुल्क भी केवल कर्ज देने के बजाय व्यापार और निवेश आधारित साझेदारी की मांग कर रहे हैं। शहबाज शरीफ का यह बयान दुनिया के सामने पाकिस्तान की उस बेबसी को दर्शाता है, जहाँ एक परमाणु शक्ति संपन्न देश अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर है।
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