Parakram Diwas: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी ने दी श्रद्धांजलि

Netaji Subhas Chandra Bose's birth anniversary

यूनिक समय, नई दिल्ली। देश आज आजाद हिंद फौज के संस्थापक और क्रांतिकारियों के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मना रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जहाँ पीएम मोदी ने नेताजी के सम्मान में अपनी सरकार द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों को गिनाया, वहीं ममता बनर्जी ने नेताजी के गायब होने के रहस्य पर दुख जताते हुए केंद्र से सभी गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।

पीएम मोदी का संदेश

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किए गए अपने संदेश में नेताजी को निडर नेतृत्व और अटूट देशभक्ति की मिसाल बताया। पीएम ने कहा कि दशकों तक देश पर शासन करने वालों के एजेंडे में नेताजी को भुला देना शामिल था, लेकिन उनकी सरकार ने इस धारणा को बदला है।

पीएम ने याद दिलाया कि नेताजी से संबंधित फाइलों और दस्तावेजों को सार्वजनिक करना एक ऐतिहासिक कदम था, जिससे देश को उनके बारे में अधिक जानने का मौका मिला। पीएम ने अंडमान-निकोबार के द्वीपों का नाम बदलने (जैसे रॉस द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप करना) और इंडिया गेट के पास उनकी भव्य प्रतिमा स्थापित करने को औपनिवेशिक मानसिकता की समाप्ति का प्रतीक बताया।मोदी ने अपने गुजरात के मुख्यमंत्री काल को याद करते हुए बताया कि उन्होंने 2009 में ‘ई-ग्राम विश्वग्राम’ योजना की शुरुआत हरिपुरा से की थी, जिसका नेताजी के जीवन में विशेष स्थान था।

ममता बनर्जी की मांग

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नेताजी को ‘देशनायक’ बताते हुए सलाम किया। हालांकि, उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह देश का सामूहिक दुर्भाग्य है कि 1945 के बाद नेताजी के साथ क्या हुआ, इसका रहस्य आज भी अनसुलझा है।

ममता बनर्जी ने मांग की कि केंद्र सरकार को नेताजी से जुड़े सभी दस्तावेजों को तुरंत सार्वजनिक करना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने पहले ही राज्य के पास मौजूद सभी गोपनीय फाइलों को सार्वजनिक कर दिया है, ताकि जनता के सामने सच आ सके। उन्होंने कहा कि दशकों बीत जाने के बाद भी इस सच्चाई का सामने न आना बेहद दुखद है।

देशभर में आज पराक्रम दिवस के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। लाल किले से लेकर कोलकाता के नेताजी भवन तक, उनके अदम्य साहस और ‘दिल्ली चलो’ के संकल्प को याद किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इंडिया गेट पर लगी उनकी प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देती रहेगी।

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