
यूनिक समय, नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आठ दिवसीय विदेश यात्रा के बाद आज, 10 जुलाई को भारत लौट आए। इस दौरे के तहत उन्होंने अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 5 देशों (घाना, अर्जेंटीना, ब्राजील, नामीबिया, त्रिनिदाद और टोबैगो) का दौरा किया। यह यात्रा पिछले दस वर्षों में उनकी सबसे लंबी द्विपक्षीय यात्रा रही। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य ग्लोबल साउथ के साथ भारत के संबंधों को प्रगाढ़ करना और व्यापार, रक्षा, ऊर्जा तथा तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी को मजबूत करना था।
घाना में ऐतिहासिक स्वागत
प्रधानमंत्री मोदी ने 2 जुलाई को अपनी यात्रा की शुरुआत घाना से की। यह तीन दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। घाना के राष्ट्रपति जॉन ड्रामनी महामा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी को घाना का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘द ऑफिसर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ से सम्मानित किया गया। बच्चों द्वारा संस्कृत श्लोकों के पाठ और 21 तोपों की सलामी से उनके स्वागत की विशेष छवि बनी।
त्रिनिदाद और टोबैगो में भारतीय विरासत का सम्मान
3 और 4 जुलाई को त्रिनिदाद और टोबैगो में प्रवास के दौरान पीएम मोदी ने संसद को संबोधित किया और भारतीय प्रवासी समुदाय की 180 वर्षों पुरानी विरासत को सम्मानपूर्वक याद किया। उन्होंने त्रिनिदाद की प्रधानमंत्री कमला प्रसाद-बिसेसर को ‘बिहार की बेटी’ कहकर संबोधित किया और उन्हें अयोध्या के राम मंदिर की प्रतिकृति और गंगा जल भेंट किया। इसके साथ ही प्रवासी भारतीयों के लिए ओसीआई (OCI) कार्ड की सुविधा की भी घोषणा की गई।
अर्जेंटीना में कई साझेदारी
4 से 5 जुलाई को पीएम मोदी अर्जेंटीना पहुंचे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति हाविएर माइली से द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों देशों के बीच रक्षा, कृषि, खनिज संसाधनों और नवीकरणीय ऊर्जा में सहयोग को बढ़ाने पर सहमति बनी। पीएम मोदी ने अर्जेंटीना के स्वतंत्रता सेनानी जोस डी सैन मार्टिन को श्रद्धांजलि दी और प्रसिद्ध बोका जूनियर्स फुटबॉल स्टेडियम का दौरा किया।
ब्रिक्स सम्मेलन में भारत की मजबूत उपस्थिति
5 से 8 जुलाई तक ब्राजील में आयोजित 17वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में वैश्विक शासन, जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ। ब्रिक्स देशों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की निंदा की। ब्राजील के राष्ट्रपति लुला डी सिल्वा के साथ पीएम मोदी की बातचीत में व्यापार, रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में सहयोग पर बल दिया गया।
नामीबिया में लोकतंत्र और तकनीक पर संवाद
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का अंतिम चरण 9 जुलाई को नामीबिया में रहा। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की 27 वर्षों में पहली आधिकारिक यात्रा थी। उन्हें नामीबिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशियंट वेलविट्सचिया मिराबिलिस’ से सम्मानित किया गया। पीएम मोदी ने नामीबियाई राष्ट्रपति नेतुम्बो नांदी-न्डैटवाह के साथ बैठक की और संसद को संबोधित करते हुए लोकतंत्र और तकनीकी सहयोग पर जोर दिया।
यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई, जिससे न केवल दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई ऊर्जा मिली, बल्कि भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि भी और अधिक सशक्त हुई। पीएम मोदी की यह पहल ग्लोबल साउथ के साथ भारत की भागीदारी को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
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