Rajasthan: माउंट आबू अब ‘आबू राज’ और जहाजपुर होगा ‘यज्ञपुर’; CM भजनलाल शर्मा का बड़ा ऐलान

Mount Abu will now be 'Abu Raj' and Jahazpur will be 'Yagyapur'

यूनिक समय, नई दिल्ली। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर ‘नाम परिवर्तन’ ने हलचल पैदा कर दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने विधानसभा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों के नाम बदलने की घोषणा की है। सरकार का तर्क है कि यह निर्णय केवल नाम का बदलाव नहीं, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक पहचान और जनभावनाओं को सम्मान देने का एक प्रयास है।

तीन शहरों की नई पहचान

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वित्त एवं विनियोग विधेयक 2026 पर चर्चा के दौरान राजस्थान के तीन महत्वपूर्ण शहरों के नाम बदलने का आधिकारिक ऐलान किया है, जिसका उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान को सुदृढ़ करना है। इस निर्णय के तहत सिरोही जिले में स्थित प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन माउंट आबू को अब ‘आबू राज’ के नाम से जाना जाएगा, क्योंकि यह क्षेत्र प्राचीन काल से ही ऋषियों की तपोभूमि और ‘अबूराज तीर्थ’ के रूप में पूजनीय रहा है।

इसी क्रम में भीलवाड़ा जिले के ऐतिहासिक कस्बे जहाजपुर का नाम बदलकर ‘यज्ञपुर’ कर दिया गया है, जो इस क्षेत्र की प्राचीन ‘यज्ञभूमि’ वाली पौराणिक मान्यताओं और विलुप्त होती सांस्कृतिक विरासत को पुनर्जीवित करने का एक प्रयास है। इसके अतिरिक्त डीग जिले के कामां को अब ब्रज संस्कृति की जड़ों से जोड़ते हुए ‘कामवन’ नाम दिया गया है, क्योंकि ब्रज के 12 पौराणिक वनों में इसका विशेष स्थान है और स्थानीय निवासी लंबे समय से इस बदलाव की मांग कर रहे थे।

विकास और विरासत का ‘बजट कनेक्शन’

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नाम परिवर्तन के साथ-साथ वर्ष 2026-27 के लिए विकास और विरासत के बीच संतुलन बिठाते हुए कई महत्वपूर्ण आर्थिक एवं सामाजिक घोषणाएं की हैं। युवाओं के लिए रोजगार का पिटारा खोलते हुए सरकार ने सरकारी नौकरियों की भर्ती संख्या को 1 लाख से बढ़ाकर 1.25 लाख करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

जनप्रतिनिधियों और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के कल्याण पर ध्यान देते हुए विधायकों के लिए महंगाई भत्ते, नए डिजिटल उपकरण और आवास योजना की घोषणा की गई है, जबकि 60 वर्ष से अधिक आयु के पत्रकारों के लिए 18,000 रुपये मासिक पेंशन और उनकी विधवा पत्नी के लिए 9,000 रुपये की सम्मानजनक सहायता राशि सुनिश्चित की गई है।

राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए GSDP के 21.52 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान लगाया गया है, जो पिछले दो वर्षों की तुलना में 41% की प्रभावशाली वृद्धि को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, प्रदेश के आध्यात्मिक और पशुधन मूल्यों को ध्यान में रखते हुए ‘गौ सेवा नीति 2026’ को प्रभावी ढंग से लागू करने का भी संकल्प लिया गया है।

सियासी घमासान

राजस्थान की राजनीति में नामों के परिवर्तन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है, जहाँ विपक्ष ने सरकार के इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया है कि प्रशासन बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए नामों का सहारा ले रहा है।

राजस्थान कांग्रेस के मीडिया प्रभारी स्वर्णिम चतुर्वेदी ने सीधे तौर पर हमला बोलते हुए कहा है कि नाम बदलने से कहीं अधिक आवश्यक इन शहरों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं को मजबूत करना है, क्योंकि जनता को केवल ‘नाम’ नहीं बल्कि धरातल पर ‘काम’ चाहिए। इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि यह निर्णय पूरी तरह स्थानीय निकायों और जनभावनाओं की मांग पर आधारित है।

अब सरकार का अगला कदम जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी करना होगा, जिसके बाद राजस्व रिकॉर्ड, साइनबोर्ड और सभी सरकारी दस्तावेजों में पुराने नामों की जगह नए नाम दर्ज होकर इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।

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