
यूनिक समय, नई दिल्ली। राजस्थान के जोधपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए पहचानी जाने वाली साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस मामले ने तब और भी नाटकीय मोड़ ले लिया जब उनकी मृत्यु के करीब चार घंटे बाद उनके इंस्टाग्राम अकाउंट से एक भावुक ‘कथित सुसाइड नोट’ पोस्ट हुआ, जिसने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी है।
एडिटेड वीडियो और ब्लैकमेलिंग का घातक खेल
साध्वी प्रेम बाईसा सोशल मीडिया पर काफी लोकप्रिय थीं, लेकिन यही लोकप्रियता उनके लिए अभिशाप बन गई। साध्वी ने पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके पिता से जुड़े एक वीडियो को एडिट कर गलत तरीके से फैलाया जा रहा है।पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया था, जिसे साध्वी ने माफी मांग लेने पर माफ कर दिया था। लेकिन आरोप है कि जेल से बाहर आते ही उसने फिर से वीडियो वायरल कर दिया। वीडियो वायरल होने के बाद साध्वी को भद्दी टिप्पणियों और भारी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा, जिससे वे गहरे मानसिक तनाव में थीं।
मृत्यु के बाद की ‘रहस्यमयी’ पोस्ट
साध्वी के इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुए संदेश ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोस्ट में लिखा था कि “मैंने जीवन का हर क्षण सनातन के लिए जिया। मैंने संत-महात्माओं से अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया था, लेकिन प्रकृति को कुछ और मंजूर था। अगर जीवन में नहीं, तो मृत्यु के बाद न्याय की उम्मीद है।” पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि यह पोस्ट किसी और ने डाली है या फिर इसे ‘शेड्यूल’ किया गया था, जो उनकी मौत के बाद अपने आप पब्लिश हो गई।
आश्रम में हंगामा और गायब सीसीटीवी फुटेज
साध्वी की मौत के बाद आरती नगर स्थित उनके आश्रम में भारी तनाव देखा गया। समर्थकों और स्थानीय लोगों ने जमकर हंगामा किया। जब साध्वी के पिता ने शुरुआत में पोस्टमार्टम से इनकार किया, तो लोगों ने उनकी गाड़ी घेर ली और निष्पक्ष जांच की मांग की। समर्थकों ने आरोप लगाया है कि आश्रम से सीसीटीवी फुटेज गायब कर दिए गए हैं, जो किसी बड़ी साजिश की ओर इशारा करते हैं।
पुलिस की जांच और न्याय की गुहार
जोधपुर पुलिस ने साध्वी के पार्थिव शरीर को महात्मा गांधी अस्पताल में रखा है, जहां मेडिकल बोर्ड द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा। पुलिस अब ब्लैकमेलिंग, डिजिटल सबूतों और सुसाइड नोट की सत्यता की गहराई से जांच कर रही है। यह मामला अब केवल एक मौत नहीं, बल्कि इस बात का उदाहरण बन गया है कि कैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर होने वाला उत्पीड़न किसी की जान ले सकता है।
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