
यूनिक समय, नई दिल्ली। भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री और हवाई ताकत को और अधिक घातक बनाते हुए बुधवार को गोवा में MH-60R ‘रोमियो’ मल्टी-रोल हेलीकॉप्टर की दूसरी स्क्वाड्रन INAS 335 (ओस्प्रे) को कमीशन किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह ने हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई दी है।
अमेरिका की लॉकहीड मार्टिन कंपनी द्वारा निर्मित MH-60R हेलीकॉप्टर को दुनिया का सबसे आधुनिक मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर माना जाता है। इसकी कमीशनिंग भारत के सैन्य आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।
यह हेलीकॉप्टर गहरे और उथले समुद्र में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने (Anti-Submarine Warfare) और उन्हें नष्ट करने में सक्षम है। यह न केवल पानी के अंदर, बल्कि समुद्र की सतह पर मौजूद दुश्मन के जहाजों पर भी सटीक निशाना साध सकता है। हिंद महासागर में चीन की बढ़ती पनडुब्बी तैनाती और ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्षेत्र में बने सुरक्षा हालातों के बीच ये हेलीकॉप्टर भारत को निर्णायक बढ़त दिलाएंगे।
MH-60R ‘रोमियो’ की विशेषताएं
MH-60R ‘रोमियो’ हेलीकॉप्टर की तकनीकी क्षमताएं इसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में एक अपराजेय योद्धा बनाती हैं। इसके उन्नत हथियारों की बात करें, तो यह हेलफायर मिसाइलों, मार्क-54 टॉरपीडो, रॉकेट और मशीन गन से लैस है, जो इसे समुद्र की सतह और गहराई दोनों में हमला करने की शक्ति प्रदान करते हैं। यह विशेष रूप से दुश्मन की पनडुब्बियों के लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है क्योंकि इसमें अत्याधुनिक सेंसर और सोनार सिस्टम लगे हैं। इसमें मौजूद ‘डिपिंग सोनार’ और सोनोबॉय लॉन्च सिस्टम गहरे समुद्र में छिपी पनडुब्बियों की सूक्ष्म हलचल को भी पकड़ लेते हैं, जबकि इसका मल्टी-मोड रडार लंबी दूरी तक निगरानी सुनिश्चित करता है।
सुरक्षा के लिहाज से यह हेलीकॉप्टर एक अभेद्य किले की तरह है। इसकी स्व-रक्षा प्रणाली में इंफ्रारेड डिवाइस और चैफ-फ्लेयर शामिल हैं, जो दुश्मन की मिसाइल का खतरा महसूस होते ही खुद-ब-खुद (ऑटोमैटिक) सक्रिय हो जाते हैं और हेलीकॉप्टर को सुरक्षित बचा ले जाते हैं। ऑपरेशन की सुविधा के मामले में यह अत्यंत लचीला है; यह भारतीय नौसेना के विध्वंसक जहाजों, फ्रिगेट और INS विक्रांत व INS विक्रमादित्य जैसे विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर से आसानी से उड़ान भर सकता है और उन पर सुरक्षित लैंडिंग कर सकता है।
रोमियो की बहु-कार्यक्षमता ही इसे दुनिया का सर्वश्रेष्ठ मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर बनाती है। यह न केवल पनडुब्बियों का शिकार और सतही जहाजों पर हमला करने में सक्षम है, बल्कि समुद्री निगरानी, खोज-बचाव (Search and Rescue) और यहां तक कि आधुनिक युद्ध के नए खतरों जैसे ‘साइबर थ्रेट’ से निपटने के लिए भी उन्नत एवियोनिक्स से लैस है।
दुश्मन का काल’ और भविष्य की तैयारी
स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन धीरेंद्र बिष्ट ने बताया कि यह हेलीकॉप्टर पारंपरिक और असममित (Asymmetric) दोनों तरह के खतरों से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है। पायलटों ने इसे ‘समुद्र में दुश्मन का काल’ करार दिया है क्योंकि यह पनडुब्बियों को बहुत दूर से ट्रैक कर उन पर हमला कर सकता है।
भारत ने अमेरिका से कुल 24 MH-60R हेलीकॉप्टरों का सौदा किया था। पहली स्क्वाड्रन (INAS 334) मार्च 2024 में कोच्चि में तैनात की गई थी। अब दूसरी स्क्वाड्रन के आने से भारत की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ गई है।
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