Shankaracharya Controversy: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आजीवन प्रतिबंध की तैयारी? मेला प्रशासन ने थमाया दूसरा नोटिस

Fair administration has issued a second notice to Swami Avimukteshwaranand

यूनिक समय, नई दिल्ली। संगम नगरी में चल रहे माघ मेले के दौरान माघ मेला प्रशासन और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच का टकराव अब चरम पर पहुंच गया है। मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नया और बेहद सख्त नोटिस जारी किया है, जिसमें न केवल उनकी वर्तमान सुविधाओं को निरस्त करने की बात कही गई है, बल्कि उनके माघ मेले में प्रवेश को ‘आजीवन प्रतिबंधित’ करने की चेतावनी भी दी गई है।

प्रशासन का गंभीर आरोप

मेला प्राधिकरण द्वारा जारी यह दूसरा नोटिस 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) की रात को उनके शिविर में चस्पा किया गया। प्रशासन का आरोप है कि मौनी अमावस्या जैसे भीड़भाड़ वाले दिन, कड़े प्रतिबंधों के बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद बग्घी लेकर मेला क्षेत्र में घुसे। प्रशासन के अनुसार, इस कृत्य से मेले में भगदड़ मचने और श्रद्धालुओं की जान को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। नोटिस में सवाल पूछा गया है कि “स्नानार्थियों की सुरक्षा संकट में डालने के लिए क्यों न आपकी सभी सुविधाएं रद्द कर दी जाएं और आपको हमेशा के लिए मेले से प्रतिबंधित कर दिया जाए?”

सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मुद्दा भी गरमाया

प्रशासन ने नोटिस में एक और बड़ा तकनीकी मुद्दा उठाया है। नोटिस के मुताबिक, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा मेले में लगाए गए बोर्ड्स पर खुद को ‘शंकराचार्य’ बताया गया है। प्रशासन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा शंकराचार्य पद के उपयोग पर फिलहाल रोक लगी हुई है, ऐसे में यह कृत्य ‘न्यायालय की अवमानना’ (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है। प्रशासन ने इन सभी बिंदुओं पर 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

“बदले की भावना से काम कर रहा प्रशासन”

इस नोटिस के सामने आने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खेमे में भारी रोष है। उनके मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगीराज ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह पूरी कार्रवाई बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने बैक डेट में नोटिस तैयार कर शिविर के पीछे चोरी-छिपे चस्पा किया है। वहीं, शिविर प्रभारी पंकज पांडेय ने तीन पन्नों का विस्तृत जवाब मेला प्राधिकरण को भेज दिया है।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह विवाद तब शुरू हुआ था जब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने संगम स्नान के दौरान उन पर लगाए गए प्रतिबंधों को ‘अन्याय’ बताया था, जबकि प्रशासन का तर्क है कि वीआईपी मूवमेंट और वाहनों पर पाबंदी आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरी है। अब नोटिस और जवाब के इस सिलसिले ने माघ मेले के आध्यात्मिक माहौल में राजनीतिक और कानूनी तपिश बढ़ा दी है।

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