
यूनिक समय, प्रयागराज/मथुरा: मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद विवाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में आज महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। जस्टिस अवनीश सक्सेना की सिंगल बेंच ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल संशोधन आवेदन पर विचार किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 12 मार्च 2026 की तारीख तय कर दी।
यह विवाद 18 समेकित (Consolidated) मूल वादों से जुड़ा है, जिनमें हिंदू पक्षकार शाही ईदगाह मस्जिद को हटाकर 13.37 एकड़ भूमि पर मंदिर बहाली और कब्जे की मांग कर रहे हैं। हिंदू पक्ष का दावा है कि औरंगजेब के काल में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थी। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष (शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी और यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड) इन वादों की पोषणीयता (Maintainability) पर सवाल उठाता रहा है और ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991’ का हवाला दे रहा है।
आज की सुनवाई में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने अपना जवाब दाखिल किया, जैसा कि पिछली सुनवाई में निर्देशित किया गया था। पक्षकारों की दलीलें सुनी गईं, जिनमें एएसआई की रिपोर्ट पर प्रारंभिक बहस शामिल थी। हालांकि, आज कोई बड़ा फैसला (जैसे सर्वे की अनुमति या वाद खारिज होना) नहीं हुआ। सुनवाई मुख्य रूप से प्रक्रियागत रही, जिसमें आपत्तियों, संशोधनों और आगे की कार्यवाही पर ध्यान केंद्रित किया गया।
सुनवाई के दौरान मथुरा में सुरक्षा व्यवस्था सख्त रही और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित उन चुनौतियों से भी जुड़ा है, जहां ‘प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट’ की वैधता पर सुनवाई चल रही है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगली तारीखों पर वाद बिंदु (Issues) तय करने या अन्य महत्वपूर्ण फैसले आ सकते हैं।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन और मुस्लिम पक्ष के महमूद प्राचा सक्रिय रहे। दोनों समुदायों ने शांति बनाए रखने की अपील की है। यह विवाद अयोध्या राम मंदिर मामले की याद दिलाता है, लेकिन वर्तमान में यह अभी परीक्षण (Trial) के चरण में है।
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