
यूनिक समय, नई दिल्ली। बदलती जीवनशैली और तनाव के कारण पिछले पाँच सालों में युवाओं में ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में 15 से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, और घंटों लैपटॉप के सामने बैठने की वर्क फ्रॉम होम की आदतों ने इस जोखिम को कई गुना बढ़ा दिया है। पाँच साल पहले ओपीडी में 45 साल से कम उम्र के स्ट्रोक मरीजों की संख्या 5% थी, जो अब बढ़कर 20 हो गई है। इसके साथ ही, ठंड की शुरुआत होते ही लापरवाही के कारण स्ट्रोक का खतरा और बढ़ जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक के प्रकार और वैश्विक आंकड़े
- इस्किमिक स्ट्रोक (85%): यह सबसे आम प्रकार है, जिसमें मस्तिष्क में खून का थक्का बनने से रक्त प्रवाह रुक जाता है।
- हेमोरेजिक स्ट्रोक (15%): इसमें मस्तिष्क की नस फटने से ब्लीडिंग होती है।
- WHO के आंकड़े: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया में 1.2 करोड़ नए स्ट्रोक मरीज दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से 25% मरीज 40 साल से कम उम्र के होते हैं।
गोल्डन ऑवर और इलाज की सुविधा
हमीदिया अस्पताल के न्यूरो फिजिशियन डॉ. आयुष दुबे ने बताया कि स्ट्रोक आने के बाद 4.5 घंटे का समय ‘गोल्डन ऑवर’ होता है। इस अवधि में थ्रॉम्बोलाइसिस इंजेक्शन देने से मस्तिष्क को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है। यह इंजेक्शन हमीदिया अस्पताल में मुफ्त मिलता है, जबकि निजी अस्पतालों में इसकी कीमत ₹40 से ₹50 हजार रुपए है। इलाज में देरी मौत या स्थायी लकवे का कारण बन सकती है।
स्ट्रोक के इन लक्षणों को पहचानें, देर न करें
- तेज़ सिरदर्द या चक्कर आना
- देखने में कठिनाई
- चेहरे का टेढ़ापन
- हाथों या पैरों में सुन्नपन
- बोलने में कठिनाई
बचाव के उपाय
- ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित रखें।
- रोज़ 30 मिनट वॉक या एक्सरसाइज करें।
- स्मोकिंग, शराब और जंक फूड से दूरी रखें।
- पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करें।
- ठंड में शरीर को गर्म रखें, पर्याप्त पानी पिएं।
इन लोगों को है ज़्यादा ख़तरा
- उच्च रक्तचाप वाले लोगों में स्ट्रोक का ख़तरा चार गुना बढ़ जाता है।
- धूम्रपान करने वालों में यह ख़तरा दोगुना हो जाता है। मधुमेह या मोटापे से ग्रस्त लोगों में स्ट्रोक का ख़तरा 1.8 गुना बढ़ जाता है।
- ठंड के मौसम में मामलों में 20-25% की वृद्धि देखी जाती है, क्योंकि रक्त जल्दी गाढ़ा और थक्का जमता है।
- यह ख़तरा उन लोगों में भी तेज़ी से बढ़ता है जो घर से काम करते हैं और जिनकी शारीरिक गतिविधि सीमित होती है।
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