
यूनिक समय, नई दिल्ली। Google, Microsoft और Meta जैसी बड़ी टेक कंपनियों में बीटेक या एमटेक की डिग्री अनिवार्य मानी जाती है, लेकिन भारतीय सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के चीफ और को-फाउंडर श्रीधर वेंबू इस सोच को चुनौती दे रहे हैं। भारतीय सॉफ्टवेयर दिग्गज जोहो (Zoho) के चीफ साइंटिस्ट और को-फाउंडर श्रीधर वेंबू ने टेक इंडस्ट्री में नौकरी पाने की पारंपरिक सोच को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी कंपनी में नौकरी पाने के लिए किसी कॉलेज डिग्री की आवश्यकता नहीं होती है।
वेंबू की भारतीय पैरेंट्स को सलाह
श्रीधर वेंबू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका की फर्म Palantir के हायरिंग अप्रोच से जुड़े एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए भारतीय पैरेंट्स को खास सलाह दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में अब स्मार्ट छात्र कॉलेज नहीं जा रहे हैं, और दूरदर्शी एम्प्लॉयर उनकी मदद कर रहे हैं।
वेंबू के अनुसार, यह एक गहरा ‘कल्चरल शिफ्ट’ है। उन्होंने कहा है कि “यह वास्तविक ‘युवा शक्ति’ है, जो उन्हें डिग्री प्राप्त करने के लिए भारी कर्ज के बिना अपने पैरों पर खड़े होने के लिए सक्षम बनाता है। यह ट्रेंड उनके दुनिया देखने के तरीके को बदल देगी और यह संस्कृति और राजनीति को भी बदल देगी।” उन्होंने भारतीय पैरेंट्स और हाई स्कूल जाने वाले छात्रों से आग्रह किया कि इस बदलते ट्रेंड को समझना चाहिए।
“डिग्री रिक्वॉयरमेंट हटाओ”
वेंबू ने स्पष्ट किया कि जोहो में जॉब पाने के लिए किसी कॉलेज डिग्री की जरूरत नहीं होती है। उन्होंने आगे कहा कि अगर कोई मैनेजर गलती से ऐसी जॉब पोस्ट करता है, जिसमें डिग्री की जरूरत होती है, तो वह तुरंत एचआर टीम को डिग्री रिक्वॉयरमेंट को हटाने के लिए बोलते हैं। यह बयान उन लाखों भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी राहत है, जो IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश के लिए हर साल JEE की कठिन परीक्षा देते हैं, इस उम्मीद में कि डिग्री उन्हें एक अच्छी टेक कंपनी में नौकरी दिलाएगी।
अनुभव से सीखते हैं वेंबू
श्रीधर वेंबू ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि तमिलनाडु के तेनकासी में उन्होंने 19 साल के एजग्रूप वाले टेक्निकल टीम के साथ काम किया था। उन्होंने इस युवा टीम की अत्यधिक ऊर्जा की तारीफ की और कहा कि उन्हें उनकी ऊर्जा को मैच करने के लिए काफी मेहनत करनी पड़ी। यह अनुभव दर्शाता है कि वेंबू ज्ञान और कौशल को पारंपरिक डिग्री से कहीं अधिक महत्व देते हैं। Zoho का यह दृष्टिकोण उन भारतीय टेक कंपनियों के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है, जो प्रतिभा की पहचान केवल औपचारिक शिक्षा के बजाय वास्तविक कौशल और क्षमता के आधार पर करना चाहते हैं।
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