आज कारगिल की चोटी से फिर हमने ललकारा है…

प्रमुख संवाददाता
यूनिक समय, वृंदावन। कारगिल विजय दिवस पर राष्ट्र चेतना मंच के तत्वावधान में गौतमपाड़ा स्थित मोही निवास पर “वीरों को नमन” काव्य संध्या का किया गया। मां शारदे के सम्मुख दीप प्रज्ज्वलन के बाद डॉ. राजीव पाण्डेय ने सरस्वती वंदना की। संस्था के संस्थापक डॉ. उमाशंकर राही ने कारगिल शहीदों को नमन करते हुए कहा कि जीवन देखकर रक्षा की बेजान सभी चट्टानों की। बोलो कौन चुका सकता है कीमत इन बलिदानों की।। अध्यक्षता करते हुए मोहन मोही ने कहा कि देश अग्रसर बनेगा देश का सरहदी विश्वास लिखा जाएगा। गीतकार बृजभूषण दीपक ने कहा कि आज कारगिल की चोटी से फिर हमने ललकारा है। कह देना गद्दार पाक से यह कश्मीर हमारा है।।

रेनू उपाध्याय ने कुछ इस प्रकार पढ़ा कि विश्व वंदिता वेद गुंजिता देव अर्चन जिसका भारत की माटी चंदन बंदन अभिनंदन। राजीव पांडे ने कहा कि देश की धमनियों का रक्त जब खौल गया शरारती शरीफ की चुलो को हिला दिया। नारी के सुहाग पर बात जब बन आई सिंदूरी बारूद ने हूंरो से मिला दिया। नेत्रपाल राघव ने काव्य पाठ करते हुए कहा कि माता भारती की आरती में पुष्प ना चढ़ाए जो, ऐसे नर भेड़ियों डियो को जल छांट दीजिए। इसके साथ ही डॉ. मधुर गोस्वामी, विवेक शास्त्री, राघव भारद्वाज, राहुल गुप्ता, सी. बी. विकल्प, नीरज वर्मा आदि ने भी कई पाठ किया। गोष्ठी का संयोजन हरबंश खंडेलवाल ने किया। संचालन बृज किशोर त्रिपाठी ने किया।

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